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कानूनजयपुर

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: दफ्तरों में बाबू बने बैठे 650 सफाईकर्मी तुरंत मैदान में लौटें, सड़कों पर सफाई नदारद रहने पर जताई नाराजगी

By The Public Hub
Last updated: May 30, 2026
3 Min Read

जयपुर। राजधानी की चरमराती सफाई व्यवस्था और सड़कों पर पसरी गंदगी को लेकर हाईकोर्ट ने बेहद तीखा रुख अपनाया है। शहर की सफाई व्यवस्था पर दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि शहर में नियुक्त करीब 650 सफाई कर्मचारी अपना मूल काम छोड़कर दफ्तरों, उद्यानों और अन्य प्रशासनिक शाखाओं में बाबू या अन्य गैर-सफाई कार्यों में लगे हुए हैं।

Contents
“कागजों में पूरी फौज, लेकिन जमीन पर सिर्फ गंदगी”लापरवाही मिलने पर जमादार और सेनेटरी इंस्पेक्टर होंगे जिम्मेदारकचरा फेंकने वालों पर जुर्माना और जनभागीदारी बढ़ाने के निर्देश

इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने प्रदेश के सभी स्थानीय निकायों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सफाई कर्मचारियों से केवल और केवल सफाई का ही काम कराया जाए।

“कागजों में पूरी फौज, लेकिन जमीन पर सिर्फ गंदगी”

अधिवक्ता विमल चौधरी द्वारा दायर इस जनहित याचिका में कोर्ट को बताया गया कि रिकॉर्ड के अनुसार शहर में करीब आठ हजार सफाई कर्मचारी तैनात हैं। कागजों में यह संख्या शहर को चमकाने के लिए पर्याप्त दिखती है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। बड़ी संख्या में कर्मचारियों को मूल कार्य से हटाकर दूसरे विभागों में अटैच (संबद्ध) कर दिया गया है।

अदालत ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए माना कि फील्ड से हटकर यदि सफाईकर्मी कार्यालयों की कुर्सियों पर बैठेंगे, तो शहर की स्वच्छता व्यवस्था का पूरी तरह से चरमराना तय है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा:

“सफाई कर्मचारियों से वही काम कराया जाना चाहिए, जिसके लिए उनकी नियुक्ति की गई है। इसके बिना शहर की जनता को साफ-सुथरा माहौल देना मुमकिन नहीं है।”

लापरवाही मिलने पर जमादार और सेनेटरी इंस्पेक्टर होंगे जिम्मेदार

खंडपीठ ने शहर के हर वार्ड और गली की सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदारी भी तय कर दी है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, इलाकों में रखे डस्टबिनों की नियमित सफाई की जिम्मेदारी सीधे तौर पर क्षेत्र के जमादार की होगी। यदि किसी भी वार्ड में कचरा मिलने या डस्टबिन न उठाने को लेकर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित जमादार और सेनेटरी इंस्पेक्टर (Sanitation Inspector) को सीधे तौर पर जिम्मेदार मानते हुए उन पर कार्रवाई की जाएगी।

कचरा फेंकने वालों पर जुर्माना और जनभागीदारी बढ़ाने के निर्देश

अदालत ने सिर्फ प्रशासन को ही नहीं, बल्कि आम जनता को भी जवाबदेह बनाने की बात कही है। कोर्ट ने निकायों को निर्देश दिए हैं कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने वाले लोगों की पहचान कर उन पर भारी जुर्माना (Penalty) लगाया जाए। इसके साथ ही, शहर को स्वच्छ बनाने के लिए स्वच्छता अभियानों में आम जनता, सामाजिक संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की भागीदारी को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया है।

TAGGED:Clean India MissionFine on LitteringHigh Court RajasthanHigh Court Strict OrdersJaipur Cleanliness DrivePIL on SanitationPublic Interest Litigation RajasthanSanitation Inspector AccountabilitySanitation Workers Protest
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