राजस्थान में सरकारी नौकरियों में फर्जीवाड़े की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा कोटा संभाग में हुए ताजा खुलासे से लगाया जा सकता है। दैनिक भास्कर की एक पड़ताल में सामने आया है कि कोटा, बारां, झालावाड़ और बूंदी जिलों में 23 कर्मचारी फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के सहारे सरकारी तंत्र में घुसपैठ कर चुके हैं। ये वो लोग हैं जो शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट हैं, लेकिन कागजों में खुद को ‘अक्षम’ दिखाकर असली हकदारों का रोजगार छीन रहे हैं।
‘चमत्कार’ ऐसा कि सुनाई देने लगा सब कुछ!
जांच में सबसे चौंकाने वाले मामले भंवर लाल सैनी (लाइब्रेरियन) और संदीप कुमार (शिक्षक) के हैं। इन दोनों ने श्रवण शक्ति (सुनने की क्षमता) के आधार पर सर्टिफिकेट बनवाए थे। पहले इनकी दिव्यांगता 41% से 45% बताई गई थी, लेकिन री-वेरिफिकेशन में यह 0% निकली। यानी ये पूरी तरह फिट हैं, फिर भी कोटे का लाभ ले रहे हैं।
UP से आजमगढ़ तक फैले तार
जालसाजी सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है। कोटा थर्मल में कार्यरत जेईएन सुरेश कुमार यादव तो उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से 60% दिव्यांगता का सर्टिफिकेट बनवा लाए थे। जब दोबारा जांच हुई तो उनकी दिव्यांगता महज 24% निकली, जो सरकारी नौकरी के लिए मान्य नहीं है।
प्रमुख फर्जीवाड़े की लिस्ट (टॉप 5 मामले):
| नाम | पद/विभाग | जिला (सर्टिफिकेट) | पहले दिव्यांगता | अब (जांच में) |
| भंवर लाल सैनी | लाइब्रेरियन, शिक्षा विभाग | बूंदी | 45% (श्रवण) | 0% (पूरी तरह फिट) |
| संदीप कुमार | शिक्षक, बारां | भरतपुर | 41% (श्रवण) | 0% (पूरी तरह फिट) |
| सुरेश कुमार यादव | जेईएन, कोटा थर्मल | आजमगढ़ (UP) | 60% (अस्थि) | 24% (अमान्य) |
| नीरज पाटीदार | कृषि पर्यवेक्षक, कोटा | झालावाड़ | 55% (अंधता) | 30% (अमान्य) |
| आशीष मीणा | थर्ड ग्रेड शिक्षक, बारां | बारां | 60% (अंधता) | 30% (अमान्य) |
सिस्टम की विफलता और आगामी कार्रवाई
इन 23 कर्मचारियों में से 4 नई नियुक्तियां हैं, जिन्हें नौकरी मिलने से पहले ही पकड़ लिया गया है, लेकिन 19 पुराने कर्मचारी ऐसे हैं जो 1 से लेकर 13 साल से सिस्टम को चूना लगा रहे हैं। SOG ने हाल ही में 44 ऐसे ही कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, जिससे स्पष्ट है कि अब इन 23 नामों पर भी कड़ी कार्रवाई होना तय है।
