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Home - शिक्षा विभाग - भरतपुर क्लर्क भर्ती घोटाला: कटऑफ से कम अंक और मेरिट से बाहर वालों को भी मिली नौकरी; एसओजी जांच की सिफारिश

शिक्षा विभाग

भरतपुर क्लर्क भर्ती घोटाला: कटऑफ से कम अंक और मेरिट से बाहर वालों को भी मिली नौकरी; एसओजी जांच की सिफारिश

By The Public Hub
Last updated: May 20, 2026
5 Min Read

भरतपुर। एक तरफ जहां नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले ने देश भर के लाखों होनहार युवाओं के सपनों को झकझोर कर रख दिया है, वहीं दूसरी ओर राजस्थान में भ्रष्ट अधिकारियों और जालसाज अभ्यर्थियों की साठगांठ से सरकारी नौकरियों की रेवड़ी बांटने का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह नया और बड़ा महा-घोटाला मुख्यमंत्री के गृह जिले भरतपुर से जुड़ा हुआ है, जहां ‘कनिष्ठ लिपिक (एलडीसी) भर्ती-2013’ में नियमों की धज्जियां उड़ाकर करीब 189 अयोग्य अभ्यर्थियों को फर्जी तरीके से सरकारी कुर्सियों पर बैठा दिया गया।

Contents
जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा: इन 10 तरीकों से किया गया महा-फर्जीवाड़ापूरे प्रदेश में फैला है फर्जी बाबूओं का नेक्सस

राज्य स्तरीय 13 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच टीम ने अपनी गहन पड़ताल के बाद पंचायती राज विभाग के शासन सचिव को 65 पन्नों की एक विस्तृत और चौंकाने वाली जांच रिपोर्ट सौंपी है। जांच टीम ने इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में गहरे भ्रष्टाचार और व्यापक अनियमितताओं को रेखांकित करते हुए मामले की जांच एसओजी (Special Operations Group) से कराने और दोषी अभ्यर्थियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मजबूत अभिशंसा की है।

जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा: इन 10 तरीकों से किया गया महा-फर्जीवाड़ा

65 पन्नों की इस जांच रिपोर्ट में भरतपुर जिला परिषद के अधिकारियों की घोर लापरवाही और निगरानी तंत्र की मिलीभगत का सिलसिलेवार पर्दाफाश किया गया है। जांच टीम ने जिन मुख्य गड़बड़ियों को चिन्हित किया है, वे इस प्रकार हैं:

  • मेरिट और कटऑफ का कत्ल: गिरोह ने इस कदर मनमानी की कि 17 ऐसे अभ्यर्थी नौकरी करते पाए गए जो मेरिट लिस्ट से पूरी तरह बाहर थे। इसके अलावा 21 अभ्यर्थियों के अंक कटऑफ से भी कम थे, और 16 अभ्यर्थियों को तो बिना किसी कटऑफ निर्धारण के ही सीधे बैकडोर एंट्री दे दी गई।
  • फर्जी और ओवरलैपिंग अनुभव: 49 अभ्यर्थियों ने एक ही समय अवधि के दोहरे अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर अनुचित लाभ उठाया। 50 अभ्यर्थियों की अनुभव अवधि आपस में ओवरलैप (टकरा) रही थी। वहीं 8 शातिर ऐसे मिले जिन्होंने जीवन में कहीं काम ही नहीं किया, लेकिन उनका अनुभव प्रमाण पत्र फाइल में लगा हुआ था।
  • फर्जी मार्कशीट और अमान्य डिग्रियां: 4 अभ्यर्थियों की 12वीं कक्षा की मार्कशीट पूरी तरह संदिग्ध पाई गई। 21 अभ्यर्थियों के कंप्यूटर योग्यता से जुड़े सर्टिफिकेट पूरी तरह अमान्य (रिजेक्टेड संस्थाओं के) थे।
  • गायब डेटा: 1 मुख्य अभ्यर्थी के तो शैक्षणिक दस्तावेजों का कोई भी प्रामाणिक रिकॉर्ड संबंधित शिक्षा बोर्ड या विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ही उपलब्ध नहीं मिला।

पूरे प्रदेश में फैला है फर्जी बाबूओं का नेक्सस

पंचायती राज विभाग के सूत्रों के अनुसार, कनिष्ठ लिपिक भर्ती-2013 की जांच राज्य स्तरीय विशेष दल द्वारा जिलेवार की जा रही है, जिसकी आंच में कई अन्य जिले भी आ चुके हैं।

  1. बीकानेर: यहाँ पूर्व में 49 लिपिक पूरी तरह फर्जी पाए गए थे। नियमानुसार उनकी सेवाएं वर्ष 2017 में ही समाप्त कर दी जानी चाहिए थीं, लेकिन रसूख और विभागीय शिथिलता के चलते वे अब तक नौकरी पर जमे हुए हैं। शासन सचिव ने इस लापरवाही पर बीकानेर जिला परिषद से सख्त जवाब तलब किया है।
  2. जयपुर व अलवर: इन दोनों जिला परिषदों में भी बड़े पैमाने पर फर्जी बाबू चिन्हित किए गए हैं। जिला परिषद अलवर ने अपने सभी संदिग्ध दस्तावेज जांच दल के सुपुर्द कर दिए हैं।

भरतपुर जिला परिषद के सीईओ मृदुल सिंह का बयान: “लिपिक भर्ती-2013 से जुड़ी यह नई राज्य स्तरीय जांच रिपोर्ट अभी आधिकारिक रूप से मेरे पास नहीं पहुंची है। जैसे ही राज्य सरकार या पंचायती राज विभाग की ओर से इस रिपोर्ट के संदर्भ में कोई आदेश या निर्देश प्राप्त होंगे, दोषियों के खिलाफ तुरंत कड़ा प्रशासनिक और विधिक एक्शन लिया जाएगा।”

जांच दल ने साफ कहा है कि अनुभव अवधि के दौरान जमा किए गए जिन भी अभ्यर्थियों के शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी या संदिग्ध हैं, उनके खिलाफ केवल सेवामुक्ति नहीं बल्कि धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की धाराओं में आपराधिक मुकदमे दर्ज होने चाहिए ताकि युवाओं के भविष्य से खेलने वाले इस नेक्सस को हमेशा के लिए तोड़ा जा सके।

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