जयपुर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जैन धर्म केवल एक पंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ और पूर्ण कला है। उन्होंने कहा कि संतों का मार्गदर्शन समाज को सही दिशा देता है और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करता है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती परिसर में नवनिर्मित ‘सुधर्मा सभा’ प्रवचन हॉल के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे।
अहिंसा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने जैन दर्शन की प्रासंगिकता पर बल देते हुए कहा:
“जैन धर्म द्वारा दिया गया ‘जियो और जीने दो’ का मूलमंत्र आज वैश्विक पर्यावरण संरक्षण का सबसे बड़ा आधार है। जब दुनिया जलवायु परिवर्तन से जूझ रही है, तब जैन धर्म के संयम और सादगी के सिद्धांत ही मानवता का भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं।”
आचार्यश्री महाश्रमणजी के प्रति व्यक्त की श्रद्धा मुख्यमंत्री ने आचार्यश्री महाश्रमणजी को मानवीय मूल्यों का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री ने अपना संपूर्ण जीवन मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया है और प्राचीन परंपराओं को आधुनिक समय के साथ जोड़कर एक नई दिशा प्रदान की है। श्री शर्मा ने इस अवसर पर आचार्यश्री से आशीर्वचन भी प्राप्त किए।
जैन विश्व भारती के योगदान की सराहना मुख्यमंत्री ने संस्थान के इतिहास को याद करते हुए कहा कि आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ की महान परंपरा को यह संस्थान प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने ‘सुधर्मा सभा’ को मानवीय मूल्यों का मंदिर बताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यहाँ से सत्य, अहिंसा और करुणा का संदेश पूरी दुनिया में फैलेगा।
समारोह में गरिमामयी उपस्थिति लोकार्पण समारोह के दौरान साध्वी प्रमुखा विश्रुत विभा, मुनि महावीर कुमार, साध्वी वर्याश्री सम्बुद्ध यशा, और जैन विश्व भारती के अध्यक्ष अमरचंद लुंकड़ सहित बड़ी संख्या में जैन मुनि, साध्वी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
