Saturday, March 21, 2026
राजधानीराजस्थान हाईकोर्ट हाई अलर्ट पर: धमकी के बाद खाली कराया गया न्यायिक परिसर

राजस्थान हाईकोर्ट हाई अलर्ट पर: धमकी के बाद खाली कराया गया न्यायिक परिसर

जयपुर: राजस्थान की न्यायिक राजधानी आज एक बार फिर ‘बम’ की दहशत से कांप उठी। जयपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट की पीठ को शुक्रवार सुबह एक अज्ञात ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई, जिसने पूरे प्रशासनिक और न्यायिक अमले में हड़कंप मचा दिया। ईमेल भेजने वाले ने अत्यंत आक्रामक भाषा का प्रयोग करते हुए दावा किया कि हाईकोर्ट परिसर के भीतर तीन शक्तिशाली RDX बम प्लांट किए गए हैं, जो कुछ ही घंटों में फटने वाले हैं। इस सूचना के मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं और आनन-फानन में अदालती कार्यवाही को रोकते हुए पूरे परिसर को खाली कराने का काम शुरू किया गया। जजों, वकीलों, कर्मचारियों और दूर-दराज से आए पक्षकारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया, जिससे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।

सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने हाईकोर्ट के चप्पे-चप्पे को छावनी में तब्दील कर दिया है। मौके पर बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad), डॉग स्क्वायड और एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) की टीमें पहुँच चुकी हैं। कोर्ट रूम, जजों के चैम्बर्स, एडवोकेट ब्लॉक और पार्किंग एरिया की सघन तलाशी ली जा रही है। सुरक्षा कारणों से आज के लिए सभी महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई स्थगित कर दी गई है और गेटों पर सशस्त्र जवानों को तैनात कर दिया गया है। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में यह छठी बार है जब हाईकोर्ट को इस तरह की धमकी मिली है। बार-बार मिल रही धमकियों और अब तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी न होने से न्यायिक परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

साइबर सेल और खुफिया विभाग अब इस धमकी भरे ईमेल के स्रोत का पता लगाने में जुटे हैं। प्रारंभिक जांच में इस ईमेल का संबंध फिर से बाहरी सर्वर या ‘VPN’ से होने की आशंका जताई जा रही है, जो पिछले मामलों के पैटर्न से मेल खाता है। धमकी देने वाले ने ईमेल में कुछ संवेदनशील सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों का भी जिक्र किया है, जिसकी बारीकी से जांच की जा रही है। वकीलों और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस बार-बार होने वाली घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे न्यायपालिका को डराने की साजिश करार दिया है और सरकार से न्यायिक परिसर के लिए एक अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार करने की मांग की है।

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