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Home - धर्म - उदया तिथि के अनुसार 11 जून को रखा जाएगा पुरुषोत्तम मास का महापर्व

धर्म

उदया तिथि के अनुसार 11 जून को रखा जाएगा पुरुषोत्तम मास का महापर्व

By The Public Hub
Last updated: June 9, 2026
6 Min Read

सनातन हिंदू धर्म में तीन वर्ष में एक बार आने वाले अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) का विशेष आध्यात्मिक और विधिक महत्व माना गया है। पंचांग कर्ता पंडित राजेंद्र किराडू के अनुसार, चूंकि यह संपूर्ण मास जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होता है, इसलिए इस पवित्र महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली ‘परमा एकादशी’ का पुण्यफल सामान्य एकादशियों की तुलना में कई हजार गुना अधिक श्रेष्ठ और मोक्षदायी माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन दिन पर जो भी श्रद्धालु पूरी श्रद्धा, संयम और विधि-विधान से व्रत, विष्णु पूजन, मंत्र जप एवं दान-पुण्य करते हैं, उन्हें भगवान जनार्दन और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा उनके जीवन के समस्त संचित पापों व भौतिक कष्टों का विधिक निवारण हो जाता है।

Contents
उदया तिथि का विधिक गणित: 11 जून को रखा जाएगा महाव्रतपरमा एकादशी (11 जून) के सटीक और शुभ विधिक मुहूर्तपंचोपचार पूजन विधि और महामंत्र का विधिक महत्वदान-पुण्य से मिलेगा अक्षय फल; 12 जून को इस समय होगा पारण

पंडित किराडू ने विशेष विधिक विश्लेषण करते हुए बताया कि अधिकमास को सनातन परंपरा में आत्मशुद्धि, भजन और दैविक साधना का सर्वाेच्च काल माना गया है। इस दौरान किए गए सकाम या निष्काम धार्मिक कार्यों का फल कभी नष्ट नहीं होता।

उदया तिथि का विधिक गणित: 11 जून को रखा जाएगा महाव्रत

शास्त्रों और पंचांग के गणितीय सूत्रों के अनुसार, इस बार परमा एकादशी तिथि की शुरुआत 10 जून, बुधवार को मध्यरात्रि (यानी 11 जून की शुरुआत) 12 बजकर 58 मिनट से प्रारंभ हो जाएगी, जो कि 11 जून, गुरुवार को रात्रि 10 बजकर 37 मिनट तक विद्यमान रहेगी। सनातन धर्म के विधिक नियमानुसार, चूंकि सूर्योदय के समय एकादशी तिथि 11 जून को उपलब्ध रहेगी, इसलिए ‘उदया तिथि’ के सर्वमान्य सिद्धांत के आधार पर परमा एकादशी का मुख्य व्रत 11 जून 2026, गुरुवार को ही पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ रखा जाएगा। गुरुवार का दिन स्वयं भगवान विष्णु का प्रिय दिन होने के कारण इस व्रत का विधिक महत्व इस बार और अधिक बढ़ गया है।

परमा एकादशी (11 जून) के सटीक और शुभ विधिक मुहूर्त

पंडित राजेंद्र किराडू के अनुसार, एकादशी के दिन प्रभु की आराधना और विधिक अनुष्ठानों के लिए पंचांग के अनुसार निम्नलिखित सांख्यिकीय शुभ मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ रहेंगे:

  • ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः साधना काल): सुबह 4 बजकर 2 मिनट से लेकर प्रातः 4 बजकर 42 मिनट तक।
  • शुभ-उत्तम मुहूर्त (महापूजन हेतु): प्रातः 5 बजकर 23 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 7 मिनट तक।
  • अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ फलदायी): दोपहर 11 बजकर 53 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक।
  • लाभ-उन्नति मुहूर्त (व्यापारिक अनुष्ठान): दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 5 मिनट तक।

पंचोपचार पूजन विधि और महामंत्र का विधिक महत्व

पंडित किराडू ने व्रत धारियों के लिए पूजा की विधिक क्रोनोलॉजी को समझाते हुए कहा कि परमा एकादशी के दिन श्रद्धालुओं को प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में शैया त्याग कर स्नान करना चाहिए और शुद्ध व सात्विक पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके पश्चात घर के पूजा घर या मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के विग्रह (प्रतिमा या चित्र) का गंगाजल और पंचामृत से शुद्धिकरण करें। प्रभु को पीले चंदन का तिलक लगाएं, पीले ऋतु पुष्प, तुलसी दल (तुलसी के पत्ते), सुवासित धूप, शुद्ध घी का दीप, मौसमी फल और विशेष नैवेद्य (भोग) अर्पित करें।

दिनभर पूर्ण संयम रखते हुए निराहार या फलाहार व्रत रखें और मानसिक शांति व आध्यात्मिक उन्नति के लिए महामंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का कम से कम 3, 5 या 11 माला का एकाग्रता के साथ जप करें। इस दिन विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता अथवा श्रीमद्भागवत महापुराण के अध्यायों का पाठ करना विधिक रूप से परम कल्याणकारी माना गया है।

दान-पुण्य से मिलेगा अक्षय फल; 12 जून को इस समय होगा पारण

शास्त्रों का विधिक मत है कि परमा एकादशी के दिन किए गए दान का फल कभी समाप्त नहीं होता, वह ‘अक्षय’ हो जाता है। इस दिन व्रतियों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, पीले वस्त्र, मौसमी फल, शीतल जल के घड़े, छतरी और गौशालाओं में हरी घास का दान (गौसेवा) अवश्य करना चाहिए। यह दान व्यक्ति के घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य का विधिक संचार करता है।

व्रत की विधिक पूर्णता को लेकर पंडित किराडू ने विशेष सावधानी बरतने को कहा है। उन्होंने बताया कि एकादशी व्रत का पारण (व्रत खोलना) अगले दिन द्वादशी तिथि के भीतर तय शुभ मुहूर्त में ही किया जाना अनिवार्य है। पंचांग के अनुसार, इस व्रत का विधिक पारण 12 जून, शुक्रवार को प्रातः 5 बजकर 23 मिनट से सुबह 8 बजकर 10 मिनट तक किया जा सकेगा। इसी निर्धारित समयावधि में श्रद्धालुओं को भगवान विष्णु का ध्यान कर, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को सीधा (अनाज-दक्षिणा) निकालने के बाद स्वयं सात्विक आहार (तुलसी दल मिश्रित जल या चरणामृत) ग्रहण कर व्रत को विधिक रूप से पूर्ण करना चाहिए।

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