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भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरोअजमेर

मेवाड़ यूनिवर्सिटी फर्जी डिग्री कांड: SOG ने मास्टरमाइंड वीरेंद्र सिंह को गाजियाबाद से दबोचा, 6 महीने से था फरार

By The Public Hub
Last updated: May 12, 2026
3 Min Read

अजमेर। राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने चित्तौड़गढ़ की मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नाम से फर्जी डिग्री और अंकतालिकाएं तैयार करने वाले गिरोह के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। एसओजी की टीम ने मामले के मुख्य आरोपी वीरेंद्र सिंह को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पिछले छह महीनों से अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर पुलिस को चकमा दे रहा था।

Contents
6 महीने की फरारी के बाद तकनीकी जाल में फंसा आरोपीपूरे उत्तर भारत में फैला था फर्जीवाड़े का नेटवर्ककैसे हुआ इस बड़े रैकेट का खुलासा?इस मामले में एसओजी अब तक सख्त रुख अपनाते हुए कई लोगों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। गिरफ्तार होने वालों में:

6 महीने की फरारी के बाद तकनीकी जाल में फंसा आरोपी

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (SOG) श्याम सुंदर बिश्नोई के नेतृत्व में टीम लंबे समय से वीरेंद्र सिंह की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। 10 मई को तकनीकी सूचना और सटीक लोकेशन के आधार पर टीम ने उसे गाजियाबाद में धर दबोचा। सोमवार को आरोपी को अजमेर में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (संख्या-एक) में पेश किया गया, जहाँ से उसे 14 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

पूरे उत्तर भारत में फैला था फर्जीवाड़े का नेटवर्क

प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस गिरोह का नेटवर्क केवल राजस्थान तक ही सीमित नहीं था, बल्कि दिल्ली-NCR सहित कई अन्य राज्यों में फैला हुआ था। आरोपी मेवाड़ यूनिवर्सिटी (गंगरार) के नाम से फर्जी दस्तावेज और मार्कशीट तैयार कर अभ्यर्थियों को मोटी रकम में बेचते थे।

एसओजी अब निम्नलिखित बिंदुओं पर पड़ताल कर रही है:

  • फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए किन तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया गया?
  • अब तक कितने अभ्यर्थियों को नकली प्रमाण पत्र बेचे जा चुके हैं?
  • इस पूरे सिंडिकेट में और कौन-कौन से सफेदपोश या तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं?

कैसे हुआ इस बड़े रैकेट का खुलासा?

इस फर्जीवाड़े की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब RPSC स्कूल लेक्चरर भर्ती परीक्षा-2022 के दौरान सांचौर की दो महिला अभ्यर्थियों (ब्रह्मा कुमारी और कमला कुमारी) की डिग्रियां फर्जी पाई गईं। राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज करवाने के बाद जांच एसओजी को सौंपी गई थी।

इस मामले में एसओजी अब तक सख्त रुख अपनाते हुए कई लोगों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। गिरफ्तार होने वालों में:

  • सांचौर की दो महिला अभ्यर्थी।
  • सरकारी शिक्षक दलपत सिंह और डॉ. सुरेश बिश्नोई।
  • यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन ध्वज कीर्ति शर्मा।
  • अन्य बिचौलिए और एजेंट।

एसओजी को उम्मीद है कि मास्टरमाइंड वीरेंद्र सिंह से पूछताछ के बाद दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई और ठिकानों पर छापेमारी की जा सकेगी और इस रैकेट की जड़ तक पहुँचा जा सकेगा।

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