उच्चतम न्यायालय ने भारतीय रेलवे और बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के बीच लंबे समय से चल रहे क्रॉस सब्सिडी और अतिरिक्त सरचार्ज विवाद पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने रेलवे की उस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें रेलवे ने खुद को ‘डीम्ड लाइसेंसी’ बताते हुए इन शुल्कों से छूट की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि रेलवे अपनी ट्रेनों, सिग्नल सिस्टम और स्टेशनों के संचालन के लिए बिजली का उपयोग एक उपभोक्ता के रूप में करता है, इसलिए उसे अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं की तरह ही निर्धारित सरचार्ज का भुगतान करना होगा। इस फैसले के बाद अकेले जयपुर डिस्कॉम को रेलवे से लगभग 1100 करोड़ रुपये की बकाया राशि मिलने की उम्मीद है। यह आदेश केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में चल रहे इसी तरह के विवादों पर भी प्रभावी होगा, जिससे बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार की संभावना है।
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