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शहरी विकास प्राधिकरण

स्वच्छ भारत मिशन: 1200 सीसी की जगह 694 की गाड़ी पर 2 टन कचरे का बोझ, इंजन सीज और ब्रेक फेल होना तय!

By The Public Hub
Last updated: April 24, 2026
3 Min Read

राजस्थान के गाँवों से कचरा उठाने के लिए पंचायती राज विभाग द्वारा 3,000 वाहनों की खरीद की तैयारी की जा रही है, लेकिन इस प्रक्रिया में एक बड़ा तकनीकी पेंच फंस गया है। विभाग द्वारा जारी रेट कॉन्ट्रैक्ट में 694 सीसी के इंजन वाले वाहन का उपयोग तय किया गया है, जिसकी क्षमता 2 टन (2000 किलो) कचरा उठाने की निर्धारित की गई है। प्रति वाहन की कीमत 7.50 लाख रुपये तय की गई है।

विशेषज्ञों की राय: ‘तकनीकी रूप से अनुपयुक्त’

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार, 694 सीसी श्रेणी का वाहन 2 टन भार उठाने के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि व्यवहारिक रूप से ऐसे वाहन केवल 800 से 900 किलो तक का सुरक्षित लोड ही उठा सकते हैं। यदि इन पर 2 टन भार लादा गया, तो इंजन पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा, हीट बढ़ेगी और इंजन सीज होने के साथ-साथ ब्रेकिंग सिस्टम भी जवाब दे सकता है, जिससे हादसों की आशंका बढ़ जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए कम से कम 1200 से 1600 सीसी के टर्बो इंजन वाले वाहनों की आवश्यकता है।

रेट कॉन्ट्रैक्ट और भ्रष्टाचार का संदेह

योजना का सबसे विवादास्पद पहलू ‘रेट कॉन्ट्रैक्ट’ है। इसके तहत जो कंपनी क्वालिफाई करेगी, पंचायतों को अनिवार्य रूप से उसी से वाहन खरीदने होंगे। चर्चा है कि ये तकनीकी शर्तें किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुँचाने के लिए बनाई गई हैं। यदि ये वाहन गाँवों में फेल होते हैं, तो 225 करोड़ रुपये की यह पूरी योजना सवालों के घेरे में आ जाएगी।


कचरा व्यवस्था में दबे 5 बड़े सवाल?

  1. 694 सीसी वाहन से 2 टन कचरा उठाने का वैज्ञानिक या तकनीकी आधार क्या है?
  2. जब एक्सपर्ट 800-900 किलो से ज्यादा सुरक्षित नहीं मान रहे, तब यह क्षमता क्यों तय की गई?
  3. क्या तकनीकी शर्तें किसी खास कंपनी के अनुकूल बनाने के लिए सुरक्षा से समझौता किया गया है?
  4. वाहनों की खरीद के लिए पंचायतों को इंजन क्षमता और कंपनी के अन्य विकल्प क्यों नहीं दिए गए?
  5. अगर ये वाहन ग्रामीण रास्तों पर फेल हुए, तो 225 करोड़ के नुकसान की जवाबदेही कौन लेगा?

सीधी बात: मुरारीलाल शर्मा (ज्वॉइंट डायरेक्टर)

  • सवाल: ये वाहन इतना वजन कैसे झेलेंगे?
    • जवाब: ये तो कमेटी ने फाइनल किया है। कई जगह पर ये ही वर्किंग में है।
  • सवाल: गाँवों की सफाई का मुद्दा है और एक्सपर्ट तो इसे खारिज कर रहे हैं?
    • जवाब: कमेटी ने कुछ सोच समझकर ही ये सब तय किया गया होगा।
  • सवाल: चर्चा है किसी कंपनी को फायदा पहुँचाने की नियत से सब प्लान हुआ है?
    • जवाब: ये खरीद पंचायत स्तर पर जरूरत पड़ने पर होगी। हम सीधे तौर पर नहीं खरीद रहे हैं। दावे से कह सकता हूँ किसी को कोई फायदा नहीं पहुँचेगा। वैसे भी टेंडर तो प्रोसेस में है।
TAGGED:Murarilal SharmaPanchayati Raj DepartmentRural Development NewsSwachh Bharat Mission RajasthanVehicle Purchase Scam
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