राजस्थान के बालोतरा स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) में उद्घाटन से महज 24 घंटे पहले लगी भीषण आग अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुकी है। इस हादसे के बाद जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रस्तावित दौरा स्थगित कर दिया गया है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने सरकार और रिफाइनरी प्रबंधन की घेराबंदी करते हुए कई तीखे सवाल दागे हैं।
“हादसा या लापरवाही?” — गहलोत का सरकार पर प्रहार
हादसे पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सरकार और मैनेजमेंट को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा, “पूरा राजस्थान तब चिंतित हो गया जब सुना कि वहां भीषण आग लगी है। जनता के बीच यह उत्सुकता और संशय बढ़ रहा है कि आखिर यह आग लगी क्यों? जब प्रधानमंत्री की विजिट प्रस्तावित हो और उससे ठीक पहले इतनी बड़ी महत्वपूर्ण यूनिट में आग लग जाए, तो कई तरह के प्रश्न खड़े होना स्वाभाविक है।”
गहलोत ने सीधे तौर पर रिफाइनरी प्रबंधन की नैतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग की और कहा कि भारत सरकार या राजस्थान सरकार को इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच करानी चाहिए ताकि जनता के सामने सच्चाई आ सके।
एक्शन में केंद्र: पेट्रोलियम मंत्रालय ने बनाई हाई-लेवल कमेटी
विपक्ष के बढ़ते दबाव और घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने तत्काल प्रभाव से एक उच्च स्तरीय जांच समिति (High-Level Committee) के गठन की पुष्टि कर दी है। मंत्रालय ने ‘X’ के माध्यम से जानकारी दी कि तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जब तक सुरक्षा ऑडिट पूरा नहीं हो जाता और आग लगने के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल जाता, तब तक उद्घाटन कार्यक्रम स्थगित रहेगा। लोकार्पण की नई तारीखों की घोषणा स्थिति की समीक्षा के बाद की जाएगी।
करोड़ों का नुकसान और सुरक्षा पर सवाल
शुरुआती जानकारी के अनुसार, रिफाइनरी की मुख्य क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में हुए इस हादसे ने न केवल करोड़ों की मशीनरी को नुकसान पहुँचाया है, बल्कि राज्य की महत्वाकांक्षी परियोजना की समयसीमा को भी आगे बढ़ा दिया है। 21 अप्रैल को होने वाला यह भव्य आयोजन अब अनिश्चितकाल के लिए टल गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह जांच न केवल आग के कारणों का पता लगाएगी, बल्कि भविष्य में प्रधानमंत्री जैसे वीवीआईपी दौरों से पहले किए जाने वाले सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) की भी समीक्षा करेगी।
