राजस्थान सरकार अब प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उसे अनुशासन और संस्कारों से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बुधवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान दो महत्वपूर्ण मोर्चों पर एक साथ काम करने की घोषणा की। मंत्री ने स्पष्ट किया कि स्कूलों का माहौल ऐसा होना चाहिए जिससे बच्चों के व्यक्तित्व का सकारात्मक निर्माण हो सके।
‘निरर्थक’ नामों से मुक्ति: 2000 नामों का मिलेगा विकल्प
मंत्री मदन दिलावर ने एक भावुक लेकिन प्रशासनिक पक्ष रखते हुए कहा कि कई बार अभिभावक अनजाने में बच्चों के ऐसे नाम रख देते हैं जो आगे चलकर उनके उपहास (मजाक) का कारण बनते हैं।
- साहसिक पहल: विभाग अब ऐसे बच्चों को अपना नाम और उपनाम (Surname) बदलने का अवसर देगा।
- नामों की सूची: इसके लिए शिक्षा विभाग स्वयं करीब दो हजार सार्थक नामों की एक सूची तैयार कर रहा है। प्रवेश के समय अभिभावकों को इनमें से नाम चुनने का विकल्प दिया जाएगा ताकि बच्चों का नाम उनकी पहचान बने, न कि मजाक।
नशेड़ी शिक्षकों की अब ‘शामत’: तैयार होगी ब्लैक लिस्ट
स्कूलों में गिरते अनुशासन को लेकर मंत्री ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने माना कि कुछ शिक्षक शराब पीकर स्कूल आते हैं या लगातार गुटखा-तंबाकू खाते रहते हैं, जिसका बुरा असर मासूम बच्चों पर पड़ता है।
- पहचान और रिपोर्ट: सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे शिक्षकों की पहचान करें जो नशा करते हैं और उनकी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय भेजें।
- जीरो टॉलरेंस: नशा करने वाले शिक्षकों पर विभाग अब बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी में है।
शिक्षा अधिकारियों के लिए अन्य महत्वपूर्ण निर्देश
शिक्षा मंत्री ने स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता और सामाजिक जुड़ाव बढ़ाने के लिए कुछ और दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं:
| गतिविधि | उद्देश्य / लाभ |
| टोपर्स के होर्डिंग्स | स्कूल में टॉप आने वाले बच्चों के फोटो लगाए जाएंगे ताकि अन्य बच्चे प्रेरित हों। |
| पूर्व छात्र मिलन (Alumni) | पुराने छात्रों का अपने स्कूल से जुड़ाव बढ़ाने के लिए सम्मान समारोह होंगे। |
| घुमंतू जातियों का प्रवेश | घुमंतू समाज के बच्चों को अनिवार्य रूप से स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा। |
| दस्तावेजों में ढील | किसी भी बच्चे का प्रवेश केवल ‘डॉक्यूमेंट’ की कमी के कारण नहीं रोका जा सकेगा। |
