भिवाड़ी/खैरथल भिवाड़ी के टपूकड़ा स्थित सलारपुर इंडस्ट्रियल एरिया में प्रस्तावित 220 केवी जीएसएस (GSS) का निर्माण रीको (RIICO) की नई जमीन आवंटन पॉलिसी के कारण उलझ गया है। रीको और विद्युत निगम के बीच दरों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में देरी की आशंका गहरा गई है।
6.48 करोड़ से 60 करोड़ कैसे पहुंचा मामला?
विद्युत निगम ने इस जीएसएस को 2026-27 के बजट सत्र में शामिल किया था और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन जमीन की दरों में अचानक हुई भारी वृद्धि ने प्रोजेक्ट पर ब्रेक लगा दिया है:
- मार्च 2025 में रीको ने 1 रुपए प्रति वर्गमीटर और डीएलसी (DLC) दर पर 18 प्रतिशत जीएसटी के आधार पर 6.48 करोड़ रुपए का डिमांड ड्राफ्ट (DD) जारी किया था।
- इस ड्राफ्ट की वैधता अवधि अप्रैल 2025 में समाप्त हो गई।
- अक्टूबर 2025 में रीको की नई पॉलिसी आई, जिसमें जमीन की बेसिक दर 10 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर तय कर दी गई।
- अब नई पॉलिसी के तहत 60 हजार वर्गमीटर जमीन के लिए करीब 60 करोड़ रुपए और उस पर 18% जीएसटी जमा कराना होगा।
3 हजार कनेक्शनों पर असर और प्रोजेक्ट के फायदे
अगर यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो क्षेत्र के औद्योगिक विकास पर सीधा असर पड़ेगा:
- करीब 60 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस 220 केवी जीएसएस की क्षमता 160 एमवीए (MVA) होगी।
- इसके शुरू होने के बाद क्षेत्र में करीब 3 हजार नए बिजली कनेक्शन जारी किए जा सकेंगे।
- इस जीएसएस को दो तरफ से फीड किया जाएगा (पहला रूट अलवर बाईपास पावरग्रिड से टपूकड़ा लाइन और दूसरा रूट नीमराना-टपूकड़ा लाइन), जिससे उद्योगों को डुअल सप्लाई मिलेगी और ब्रेकडाउन/ट्रिपिंग की समस्या से निजात मिलेगी।
- वर्तमान में सलारपुर को 220 केवी खुशखेड़ा जीएसएस (जो 320 मेगावाट क्षमता के साथ लगभग फुल लोड पर है) और कारोली जीएसएस (160 मेगावाट में से 120 मेगावाट उपयोग) से सप्लाई मिल रही है।
अधिकारियों का क्या कहना है?
विद्युत निगम ने फरवरी और मार्च 2026 में पत्र लिखकर पुराने डीडी को री-वैलिडेट (पुनः मान्य) करने की मांग की थी, लेकिन रीको ने नई दरों का हवाला देकर फाइल जयपुर मुख्यालय भेज दी है।
“सलारपुर 220 केवी जीएसएस के लिए पिछले साल 6.48 करोड़ की जीएसटी राशि का डीडी निकाला था, जिसकी अवधि समाप्त हो गई। हमने रीको को इसे री-वैलिडेट करने के लिए पत्र लिखे हैं। उम्मीद है मार्च अंत तक समाधान हो जाएगा।” – महिपाल यादव, एसई, आरवीपीएनएल
“नई पॉलिसी के अनुसार अब जमीन की दर करीब 60 करोड़ रुपए हो गई है। फाइल जयपुर मुख्यालय भेज दी गई है, वहीं से अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उसके बाद ही जीएसएस के लिए जमीन दी जाएगी।” – अखिल अग्रवाल, यूनिट हेड, रीको सेकंड, भिवाड़ी
अब सभी की निगाहें जयपुर मुख्यालय के निर्णय पर टिकी हैं, जिसके मार्च के अंत तक आने की संभावना है। वहीं, मई 2026 में मुख्य टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।
