जयपुर गुलाबी नगरी जयपुर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए जयपुर मेट्रो (Jaipur Metro) नेटवर्क के बड़े विस्तार की कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में मेट्रो परियोजना की अहम समीक्षा बैठक ली।
इस बैठक में शहर के घनी आबादी वाले और बाहरी इलाकों— आमेर, जगतपुरा, बगराना (आगरा रोड) और आईएसबीटी (ISBT) हीरापुरा तक मेट्रो नेटवर्क पहुंचाने के लिए एक नया मास्टर प्लान और कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शहरवासियों को सुगम परिवहन देना सरकार की प्राथमिकता है और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरी होनी चाहिए।
आमेर के लिए दो संभावित रूट प्रस्तावित
पर्यटन के लिहाज से सबसे अहम माने जाने वाले ‘आमेर’ को मेट्रो से जोड़ने के लिए बैठक में दो रूट विकल्पों पर प्रेजेंटेशन दिया गया:
- पहला विकल्प (एलिवेटेड): गलता गेट से शुरू होकर दिल्ली बायपास और जलमहल होते हुए आमेर तक।
- दूसरा विकल्प (अंडरग्राउंड + एलिवेटेड): बड़ी चौपड़ से जोरावर सिंह गेट तक अंडरग्राउंड (भूमिगत) ट्रैक और उसके आगे एलिवेटेड ट्रैक के जरिए आमेर तक।
(चूंकि परकोटे में अंडरग्राउंड हिस्से की निर्माण लागत बहुत ज्यादा है, इसलिए इस पर अंतिम तकनीकी और वित्तीय निर्णय होना अभी बाकी है।)
जगतपुरा, हीरापुरा और बगराना का रूट प्लान
बैठक में शहर के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों के लिए भी रूपरेखा रखी गई:
- जगतपुरा रूट: ट्रांसपोर्ट नगर से राजापार्क, अरण्य भवन होते हुए एपेक्स सर्किल तक मेट्रो ले जाने का विकल्प है। इसके साथ ही टोंक रोड, सांगानेर और एयरपोर्ट क्षेत्र को भी मेट्रो कनेक्टिविटी देने पर विचार किया जा रहा है।
- हीरापुरा बस स्टैंड: अजमेर रोड स्थित नए आईएसबीटी हीरापुरा को 200 फीट बाईपास रोड के जरिए सीधे मेट्रो से जोड़ने का प्रस्ताव है।
- बगराना-कानोता: आगरा रोड के जरिए बगराना और भविष्य में कानोता तक मेट्रो विस्तार की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
चुनौती: फेज-2 की DPR केंद्र में लंबित, 11 साल में सिर्फ 11 किमी का सफर
जयपुर मेट्रो का पहला चरण 2014 में शुरू हुआ था, लेकिन तब से लेकर अब तक यह सिर्फ मानसरोवर से बड़ी चौपड़ (करीब 11 किमी) के बीच ही सिमटी हुई है।
- फेज-2 का इंतजार: करीब 42 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित फेज-2 का काम अभी तक धरातल पर शुरू नहीं हो सका है। राज्य सरकार ने मई 2025 में इसकी फाइनल डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय को भेजी थी, जो पिछले 9 महीनों से मंजूरी के लिए लंबित है।
- आगे की प्रक्रिया: अधिकारियों के अनुसार, केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया में कम से कम 2 महीने लगेंगे और इसके निर्माण में करीब 5 साल का समय लग सकता है।
वर्तमान में फेज-1सी (बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर) और फेज-1डी (मानसरोवर से अजमेर रोड चौराहा) की प्रगति पर भी काम चल रहा है।
