Sunday, March 22, 2026
जयपुरजयपुर गणगौर 2026: शाही सवारी ने रचा वैभव का इतिहास; आज निकलेगी 'बूढ़ी गणगौर', जानें रूट और समय

जयपुर गणगौर 2026: शाही सवारी ने रचा वैभव का इतिहास; आज निकलेगी ‘बूढ़ी गणगौर’, जानें रूट और समय

जयपुर: गुलाबी नगरी जयपुर की सड़कों पर शनिवार को गणगौर महोत्सव-2026 की शाही सवारी ने ऐसा रंग जमाया कि पूरा शहर लोक संस्कृति, आस्था और ऐतिहासिक वैभव में डूबा नजर आया। नगाड़ों की गूंज, शहनाई की मधुर तान और “गौर माता की जय” के जयकारों के बीच सजी-धजी पालकियों में विराजी गणगौर माता के दर्शन के लिए भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। अब आज (रविवार) को ‘बूढ़ी गणगौर’ की शाही सवारी के साथ यह लोक महोत्सव अपने अंतिम और सबसे भावपूर्ण चरण में प्रवेश करेगा।

पुष्पवर्षा से स्वागत, विदेशी पर्यटकों ने भी किया कैमरे में कैद

शनिवार शाम 5:45 बजे जैसे ही सवारी सिटी पैलेस परिसर से रवाना हुई, परकोटे का कोना-कोना जीवंत हो उठा। त्रिपोलिया गेट से लेकर छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार तक छतों, बालकनियों और सड़कों पर खड़े लोगों ने पुष्पवर्षा कर माता का स्वागत किया। इस अद्भुत सांस्कृतिक आयोजन की झलकियों को जयपुरवासियों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों ने भी उत्साह के साथ अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया।

लोक कलाकारों और 32 लवाजमों ने बिखेरी छटा

  • 210 लोक कलाकारों का जादू: शोभायात्रा में कच्छी घोड़ी, गैर, कालबेलिया, चरी और घूमर जैसे नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रावणहत्था, भपंग और शहनाई की धुनों ने पूरे वातावरण को सुरमयी बना दिया।
  • पारंपरिक लवाजमा: इस बार 32 पारंपरिक लवाजमों की मौजूदगी ने सवारी को और भी भव्य बना दिया। सुसज्जित हाथी, ऊंट दल, घोड़े, विक्टोरिया कैरिज और विशेष रूप से पहली बार शामिल ‘शंकर बैंड’ की धुनों ने खास आकर्षण पैदा किया।

आज निकलेगी ‘बूढ़ी गणगौर’, क्या है रूट?

रविवार को निकलने वाली ‘बूढ़ी गणगौर’ की सवारी को विशेष रूप से विदाई और परंपरा के चरम रूप में देखा जाता है। पर्यटन विभाग के उप निदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, आज की सवारी का कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा:

  • समय: शाम 5:45 बजे रवानगी।
  • रूट (Route): सिटी पैलेस से शुरू होकर त्रिपोलिया गेट, छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार से गुजरते हुए यह सवारी तालकटोरा/पोंड्रिक पार्क तक पहुंचेगी।
  • लाइव प्रसारण: कल की तरह आज भी इस ऐतिहासिक परंपरा का सीधा प्रसारण (Live Telecast) किया जाएगा, ताकि देश-विदेश में बैठे राजस्थानी भी इससे जुड़ सकें।

📌 फैक्ट बॉक्स: क्या होती है ‘बूढ़ी गणगौर’?

  • यह गणगौर महोत्सव का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है।
  • इस सवारी को माता की “विदाई” (ससुराल गमन) की परंपरा के रूप में निकाला जाता है।
  • यह विवाहित महिलाओं की अटूट आस्था और अखंड सौभाग्य का प्रतीक है।
  • सांस्कृतिक रूप से इसे शिव-पार्वती के पुनर्मिलन की अभिव्यक्ति माना जाता है।

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