जयपुर: राजस्थान की राजनीति में आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने दावा किया है कि आगामी जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन में प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या 70 तक बढ़ सकती है। इसके बाद राजस्थान विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या 200 से बढ़कर 270 हो जाएगी। देवनानी ने यह जानकारी जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान साझा की।
भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार होगा सदन:
स्पीकर देवनानी ने कहा कि जनगणना जल्द होने वाली है और 2028 तक सीटों की संख्या बढ़ने की प्रबल संभावना है। इसी भविष्य की जरूरत को देखते हुए सदन में 280 विधायकों के बैठने की क्षमता वाला नया हॉल तैयार करवाया जाएगा। इसके लिए पूर्व में विधान परिषद के लिए बने स्ट्रक्चर को आधुनिक सदन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में संसद की तर्ज पर ‘सेंट्रल हॉल’ बनाने के लिए 14 करोड़ रुपए की घोषणा की है, जहाँ विधायक अनौपचारिक चर्चा और भोजन कर सकेंगे।
1977 के बाद पहली बार बढ़ेंगी सीटें:
राजस्थान में सीटों की संख्या में आखिरी बार बदलाव साल 1977 में हुआ था, जब संख्या 184 से बढ़ाकर 200 की गई थी। इससे पहले 1952 में 160 सीटें थीं, जो 1957 में 167 और 1967 में 184 हुई थीं। नए परिसीमन से प्रदेश का सियासी नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा। कई नए विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आएंगे, जबकि कई सीटों का आरक्षण (SC/ST) स्तर बदल सकता है, जिससे मौजूदा दिग्गजों के चुनावी समीकरण भी प्रभावित होंगे।
