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Home - धर्म - नृसिंह द्वादशी 2026: शत्रुओं के नाश और सुख-समृद्धि के लिए इस विधि से करें भगवान गोविन्द का पूजन

धर्म

नृसिंह द्वादशी 2026: शत्रुओं के नाश और सुख-समृद्धि के लिए इस विधि से करें भगवान गोविन्द का पूजन

By The Public Hub
Last updated: February 27, 2026
2 Min Read

हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को नृसिंह द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। भगवान विष्णु के प्रमुख दशावतारों में से भगवान नृसिंह को चतुर्थ अवतार माना गया है, जिन्होंने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए स्तंभ चीरकर अवतार लिया था। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान नृसिंह के रूप की पूजा-अर्चना करने से शत्रुओं का नाश होता है और भक्तों को समस्त प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है।

गोविन्द द्वादशी: गाय और पृथ्वी के रक्षक का वन्दन

नारदपुराण एवं भविष्यपुराण के अनुसार, इस पावन तिथि पर भगवान गोविन्द के पूजन का भी विशेष विधान है, इसीलिए इसे गोविन्द द्वादशी भी कहा जाता है। ‘गोविन्द’ का शाब्दिक अर्थ है “गाय अथवा पृथ्वी के रक्षक”। इसी दिन भविष्यपुराण में वर्णित ‘सुकृत द्वादशी’ और ‘मनोरथ द्वादशी’ व्रतों का अनुष्ठान भी किया जाता है, जिनका आरम्भ फाल्गुन शुक्ल एकादशी से होता है। यह दिन भक्तों के लिए अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने और पुण्य संचय करने का दुर्लभ अवसर होता है।

शास्त्र सम्मत पूजन विधि और दान का महत्व

नारदपुराण के अनुसार, इस दिन उपवास रखकर “गोविन्दाय नमस्तुभ्यम्” मंत्र से भगवान का पूजन करना चाहिए। पूजन के बाद घृत और तिल की 108 आहुतियों से हवन करें और एक सेर दूध से भगवान गोविन्द का अभिषेक करें। अगले दिन प्रातः नित्य कर्मों के बाद पुनः पूजन कर ब्राह्मण को चार सेर धान, वस्त्र और दक्षिणा दान करनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इस विधि से व्रत का पालन करने से मनुष्य समस्त पापों से मुक्त होकर महान यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त करता है।

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