जयपुर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशन में राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ अपनी मुहिम तेज कर दी है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने आरजीएचएस योजना में गंभीर धांधली पाए जाने पर 8 और कार्मिकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
करोड़ों का दुरुपयोग और सख्त कार्रवाई
राज्य सरकार आरजीएचएस के सुचारू संचालन के लिए कड़े कदम उठा रही है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अब तक अनियमितताओं के मामलों में करीब 19 एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं। इसके साथ ही निजी अस्पतालों, फार्मेसी और अन्य हितधारकों से अब तक लगभग 39 करोड़ रुपये की रिकवरी की गई है।
इन 8 कार्मिकों पर गिरी गाज
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि इन कर्मचारियों ने आरजीएचएस कार्ड, सुविधाओं और राजकीय धन का दुरुपयोग किया, जो सेवा आचरण नियमों का सीधा उल्लंघन है। निलंबित किए गए कार्मिकों में शामिल हैं:
- भरतपुर: सौरभ कुमार रावत (नर्सिंग ऑफिसर), मीना कुमारी चौधरी (महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता), मंजू कुमारी (सीनियर नर्सिंग ऑफिसर), सुरेश चंद गुप्ता (नर्सिंग ऑफिसर) और अनुपमा (महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता)।
- डीग: किशन देई (महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता)।
- बयाना: सत्यप्रकाश छावड़ी (नर्सिंग ऑफिसर)।
- फलौदी: तुलसी देवी (महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता)।
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी आरजीएचएस योजना में गड़बड़ी करने पर 7 डॉक्टरों को निलंबित किया जा चुका है। साथ ही, एक अस्पताल और एक डायग्नोस्टिक सेंटर के विरुद्ध पुलिस केस दर्ज करवाया गया है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि भविष्य में भी ऐसी अनियमितताओं पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।
