Friday, March 20, 2026
राजधानीThe Public Hub Impact: NOC के भरोसे नहीं चलेंगे स्कूल, शिक्षा विभाग ने बदला सिस्टम

The Public Hub Impact: NOC के भरोसे नहीं चलेंगे स्कूल, शिक्षा विभाग ने बदला सिस्टम

जयपुर: राजस्थान के शिक्षा जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। निजी स्कूलों की मनमानी और नियमों के ढीलेपन को लेकर ‘The Public Hub’ द्वारा लगातार की गई सटीक रिपोर्टिंग का बड़ा असर हुआ है। राजस्थान शिक्षा विभाग ने अब बरसों से चले आ रहे पुराने सिस्टम को बदलते हुए निजी स्कूलों पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है।

नए प्रावधान के तहत, अब CBSE या अन्य बोर्ड से संबद्ध निजी स्कूलों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक के संचालन के लिए केवल एनओसी (NOC) से काम नहीं चलेगा। अब इन स्कूलों को राज्य सरकार से आधिकारिक मान्यता यानी ‘क्रमोन्नति’ लेना अनिवार्य होगा।

अगले सत्र से 1000 स्कूलों पर पड़ेगा असर

माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह नया नियम अगले शैक्षणिक सत्र से पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा। इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के करीब 1000 निजी स्कूलों पर पड़ेगा। विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि कोई स्कूल इस आदेश की पालना नहीं करता है, तो उसकी एनओसी तुरंत वापस ले ली जाएगी। खास बात यह है कि यह नियम नए स्कूलों के साथ-साथ पहले से चल रहे स्कूलों पर भी लागू होगा।

‘The Public Hub’ ने उजागर किया था सिस्टम का लूपहोल

अब तक के सिस्टम में, शिक्षा विभाग स्कूलों को केवल कक्षा 8वीं तक की मान्यता देता था। इसके बाद अन्य बोर्ड (जैसे CBSE) से जुड़ने के लिए विभाग सिर्फ एक एनओसी जारी करता था, जिसके दम पर स्कूल स्वतंत्र रूप से 12वीं तक की कक्षाएं चलाते थे।

‘The Public Hub’ ने अपनी विशेष रिपोर्ट्स में दिखाया था कि कैसे कई स्कूल इस एनओसी की आड़ में सरकारी मानकों को ताक पर रख रहे थे। अब राज्य सरकार ने इस लूपहोल को बंद करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उच्च कक्षाओं के लिए भी राज्य स्तर पर क्रमोन्नति की प्रक्रिया अनिवार्य होगी।

निजी स्कूल संचालकों में हड़कंप, ‘निरीक्षक राज’ का लगाया आरोप

सरकार के इस फैसले के बाद निजी स्कूल संचालकों ने इसका पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है। ‘सोसाइटी फॉर अनएडेड स्कूल्स’ के अध्यक्ष दामोदर गोयल का कहना है कि यह आदेश ‘राजस्थान गैर-सरकारी शिक्षा संस्थान अधिनियम 1989’ का उल्लंघन है। संचालकों ने निम्नलिखित चिंताएं जताई हैं:

  • अधिनियम में एनओसी वापस लेने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
  • इस नियम से विभाग में भ्रष्टाचार और ‘निरीक्षक राज’ बढ़ेगा।
  • स्कूलों के लिए कागजी कार्यवाही और प्रशासनिक दबाव बढ़ जाएगा।

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