जयपुर: होली की छुट्टियों के बाद राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार से पुनः शुरू हो गया है। सरकार आज सदन में आम जनता और व्यापारियों को बड़ी राहत देने के उद्देश्य से ‘राजस्थान जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक’ पेश करने जा रही है। इस विधेयक के पारित होने के बाद प्रदेश के 11 विभिन्न अधिनियमों में किए गए मामूली उल्लंघनों या तकनीकी गलतियों पर अब लोगों को जेल नहीं जाना पड़ेगा। कारावास (Jail) जैसे कड़े आपराधिक दंडों को हटाकर उनकी जगह केवल आर्थिक दंड (Fine) का प्रावधान किया जाएगा।
केंद्र की तर्ज पर लाया जा रहा है यह बिल
यह महत्वपूर्ण विधेयक केंद्र सरकार के ‘जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम-2023’ की तर्ज पर राजस्थान में लाया जा रहा है। सरकार ने पिछले साल दिसंबर में कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे एक अध्यादेश (Ordinance) के रूप में लागू किया था। अब कानूनी प्रक्रिया के तहत इसे सदन के पटल पर रखा जाएगा, और विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद यह स्थायी कानून के रूप में लागू हो जाएगा।
इन 3 प्रमुख मामलों में मिलेगी सबसे बड़ी राहत:
- राजस्थान वन अधिनियम-1953 (आदिवासियों-ग्रामीणों को राहत):
- वन भूमि में अनजाने में मवेशी (पशु) चराने पर पहले छह महीने तक की जेल या 500 रुपए जुर्माना अथवा दोनों का कड़ा प्रावधान था। अब नए बिल के तहत जेल की सजा को पूरी तरह से हटा दिया जाएगा। इसकी जगह केवल जुर्माना और वन को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति का प्रावधान रहेगा। इससे विशेषकर ग्रामीणों और आदिवासियों को बड़ी राहत मिलेगी।
- राजस्थान राज्य सहायता (उद्योग) अधिनियम-1961 (व्यापारियों को राहत):
- सरकार से सहायता प्राप्त करने वाले किसी उद्योग के प्रभारी द्वारा अगर मामूली प्रक्रियात्मक अपराध हो जाता है (जैसे निरीक्षण के लिए समय पर बहीखाते, खाते या अन्य जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत न करना), तो पहले इसके लिए कारावास का प्रावधान था। अब इसे हटाकर केवल ‘अर्थदंड’ (Financial Penalty) तक सीमित कर दिया जाएगा।
- जयपुर वाटर सप्लाई एवं सीवरेज बोर्ड अधिनियम-2018 (आम शहरी को राहत):
- पानी की बर्बादी करने, बिना अनुमति के कनेक्शन लेने या सीवर लाइन में किसी प्रकार की रुकावट पैदा करने जैसे मामलों में अब तक जेल का प्रावधान था। नए कानून के लागू होने पर इन मामलों में जेल की सजा को खत्म कर दिया जाएगा और इसकी जगह केवल आर्थिक दंड (जुर्माना) लगाया जाएगा।
