Saturday, March 21, 2026
राजधानीकर्तव्य पथ पर दिखेगा राजस्थान की उस्ता कला का जादू: गणतंत्र दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल में बीकानेर की झांकी ने मोहा मन

कर्तव्य पथ पर दिखेगा राजस्थान की उस्ता कला का जादू: गणतंत्र दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल में बीकानेर की झांकी ने मोहा मन

नई दिल्ली / जयपुर, इस वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत की चमक पूरी दुनिया देखेगी। शुक्रवार को आयोजित गणतंत्र दिवस परेड की ‘फुल ड्रेस रिहर्सल’ में बीकानेर की विश्वप्रसिद्ध उस्ता कला पर आधारित राजस्थान की झांकी ने अपनी बेमिसाल शिल्पकला और जीवंत प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

“राजस्थान मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श”: झांकी की मुख्य विशेषताएं

झांकी के डिजाइनर और पर्यवेक्षक श्री हर शिव कुमार शर्मा ने बताया कि इस वर्ष की थीम “राजस्थान मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श” रखी गई है। झांकी को बेहद आधुनिक और कलात्मक ढंग से तैयार किया गया है:

  • अग्र भाग (Front): झांकी के सबसे आगे राजस्थान के प्रसिद्ध लोक वाद्य ‘रावणहट्टा’ को बजाते हुए एक कलाकार की 180 डिग्री घूमती हुई प्रतिमा लगाई गई है। इसके साथ ही उस्ता कला से सजी सुराही, कुप्पी और दीपकों को आकर्षक फ्रेम में प्रदर्शित किया गया है, जिसकी ऊंचाई करीब 13 फीट है।
  • मध्य भाग (Trailer): यहाँ बीकानेर की पारंपरिक उस्ता कला को जीवित दिखाने के लिए घूमती हुई कुप्पियां और हस्तशिल्प पर बारीकी से काम करते हुए कारीगरों के दृश्यों को दर्शाया गया है।
  • पृष्ठ भाग (Rear): झांकी के पिछले हिस्से में एक विशाल ऊँट और ऊँट सवार की प्रतिमा है, जो राजस्थान के मरुस्थलीय जीवन और शौर्य का प्रतीक है। इसके चारों ओर सुनहरी नक्काशी वाले मेहराब उस्ता कला की बारीकियों को पेश कर रहे हैं।
  • सांस्कृतिक रंग: झांकी के साथ चल रहे कलाकारों ने पारंपरिक ‘गैर नृत्य’ की शानदार प्रस्तुति दी, जिसने राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को और भी प्रभावशाली बना दिया।

वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन

राजस्थान ललित कला अकादमी के सचिव डॉ. रजनीश हर्ष ने बताया कि इस भव्य झांकी का निर्माण राज्य की उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन व संस्कृति मंत्री दिया कुमारी, अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता और उप सचिव अनुराधा गोगिया के कुशल मार्गदर्शन में किया गया है।

क्या है उस्ता कला?

बीकानेर की उस्ता कला में ऊँट की खाल या लकड़ी पर सोने की बेहद महीन नक्काशी और मुनव्वत का काम किया जाता है। हाल ही में इस कला को जीआई (GI) टैग भी मिला है। गणतंत्र दिवस परेड में इस कला का प्रदर्शन राजस्थान की समृद्ध कलात्मक परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देगा।

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