Saturday, March 21, 2026
राजधानीरटने के बजाय 'करियर जीने' पर जोर: UNICEF के सहयोग से राजस्थान शिक्षा विभाग बदलेगा स्कूली बच्चों की तकदीर

रटने के बजाय ‘करियर जीने’ पर जोर: UNICEF के सहयोग से राजस्थान शिक्षा विभाग बदलेगा स्कूली बच्चों की तकदीर

जयपुर, राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों के भविष्य को नई दिशा देने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब करियर गाइडेंस केवल एक औपचारिक गतिविधि (फॉर्मल एक्टिविटी) नहीं रहेगी, बल्कि इसे अगले तीन वर्षों के लिए एक स्ट्रक्चर्ड और टिकाऊ रोडमैप के रूप में लागू किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को उनकी योग्यता और रुचि के अनुसार करियर चुनने के लिए सशक्त बनाना है।

NEP 2020: सिर्फ करियर चुनना नहीं, उसे जीना है

वोकेशनल एजुकेशन के डिप्टी डायरेक्टर दलचंद गुप्ता ने बताया कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) 2020 के विजन के अनुरूप विभाग अब छात्रों को सिर्फ रोजगार के लायक नहीं, बल्कि जीवन के हर पड़ाव पर सही निर्णय लेने में सक्षम बना रहा है। उन्होंने कहा कि आज विकल्पों की कमी नहीं है, बल्कि सही दिशा की जरूरत है।

इन संस्थाओं के सहयोग से तैयार हुआ रोडमैप

यह व्यापक कार्ययोजना किसी एक विभाग का नहीं, बल्कि साझा प्रयास का परिणाम है:

  • राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद (समग्र शिक्षा अभियान), जयपुर
  • राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (RSCERT), उदयपुर
  • टेक्निकल सपोर्ट: UNICEF राजस्थान और अंतरंग फाउंडेशन।

इस पहल की मुख्य विशेषताएं:

  1. स्वयं का करियर मैप: छात्र अपनी रुचि और क्षमता के आधार पर अपना करियर मार्ग खुद तय करेंगे।
  2. हाइब्रिड लर्निंग मॉडल: गाइडेंस के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रैक्टिकल अनुभवों का उपयोग किया जाएगा, जो क्लासरूम की पारंपरिक पढ़ाई से हटकर होगा।
  3. शिक्षक-अभिभावक-इंडस्ट्री तालमेल: विभाग शिक्षकों और माता-पिता के साथ-साथ इंडस्ट्री के विशेषज्ञों को भी इस इकोसिस्टम से जोड़ रहा है।
  4. काउंसलर्स की मजबूती: स्कूल स्तर पर करियर काउंसलर्स की भूमिका को पहले से कहीं अधिक प्रभावी और सक्रिय बनाया जाएगा।

“छात्र खुद बनें अपनी राह के निर्माता”

राज्य-स्तरीय वर्कशॉप की अध्यक्षता करते हुए एडिशनल स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर (सेकंड) अशोक कुमार मीणा ने जोर दिया कि छात्रों पर कोई करियर थोपा नहीं जाना चाहिए। उन्हें अपनी ताकत और कमजोरियों को समझने का मौका मिलना चाहिए ताकि वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। वर्कशॉप में छात्र-अनुकूल संवाद (Student-friendly communication) और आत्मविश्वास बढ़ाने की तकनीकों पर विशेष मंथन किया गया।

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