Saturday, March 21, 2026
राजधानीअभियुक्तों की प्राइवेसी पर हाईकोर्ट सख्त: राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने जारी किए नए आदेश— अब न फोटो खिंचवा सकेंगे, न होगा मीडिया ट्रायल

अभियुक्तों की प्राइवेसी पर हाईकोर्ट सख्त: राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने जारी किए नए आदेश— अब न फोटो खिंचवा सकेंगे, न होगा मीडिया ट्रायल

जयपुर, राजस्थान पुलिस अब किसी भी गिरफ्तार अभियुक्त को मीडिया के सामने ‘अपराधी’ की तरह पेश नहीं कर पाएगी। मानननीय हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद पुलिस मुख्यालय ने अभियुक्तों की निजता के अधिकार (Right to Privacy) को सुरक्षित रखने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (क्राइम) डॉ. हवा सिंह घुमरिया ने इस संबंध में सभी जिला पुलिस अधीक्षकों और थानों को आदेश भेज दिए हैं।

सार्वजनिक अपमान पर रोक: पुलिस ब्रीफिंग में भी गरिमा का ध्यान

नए आदेशों के अनुसार, पुलिस हिरासत में लिए गए किसी भी व्यक्ति के साथ मानवीय, सभ्य और विधिसम्मत व्यवहार करना अनिवार्य होगा। पुलिस अब किसी भी अभियुक्त को सार्वजनिक रूप से अपमानित नहीं कर सकेगी और न ही उसे किसी अपराधी की तरह प्रदर्शित किया जाएगा।

आदेश की मुख्य बातें:

  • सोशल मीडिया पर पाबंदी: गिरफ्तारी के समय या उसके बाद अभियुक्त का फोटो या वीडियो पुलिस के आधिकारिक या अनौपचारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (जैसे X, Facebook) पर अपलोड नहीं किया जाएगा।
  • मीडिया और प्रेस: पुलिस अभियुक्तों की फोटो मीडिया या प्रेस के साथ साझा नहीं करेगी। किसी भी स्थिति में अभियुक्त को मीडिया के सामने अपमानजनक हालात में पेश नहीं किया जाएगा।
  • शब्दावली का चयन: पुलिस ब्रीफिंग के दौरान अभियुक्त के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द गरिमापूर्ण होंगे। ऐसा कोई भी कार्य नहीं किया जाएगा जिससे ‘मीडिया ट्रायल’ को प्रोत्साहन मिले।

सभ्य व्यवहार और विशेष संवेदनशीलता

मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि अभियुक्त को थाने लाने, ले जाने या वहां रखने की व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित और सभ्य होनी चाहिए। विशेष रूप से महिलाओं, वृद्धों, युवतियों और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति पुलिस को विशेष संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

अक्सर देखा जाता है कि पुलिस किसी बड़ी गिरफ्तारी के बाद अभियुक्त का चेहरा दिखाकर फोटो खिंचवाती है या वीडियो जारी करती है। हाईकोर्ट ने इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन माना है, क्योंकि दोष सिद्ध होने से पहले किसी को भी सार्वजनिक रूप से ‘अपराधी’ के तौर पर प्रचारित करना उसके भविष्य और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाता है।

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