Saturday, March 21, 2026
जयपुरभर्ती परीक्षा या मजाक? 0.0033 की कट-ऑफ पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, जस्टिस बोले- 'शून्य अंक लाने वाले सरकारी सेवा के योग्य कैसे?'

भर्ती परीक्षा या मजाक? 0.0033 की कट-ऑफ पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, जस्टिस बोले- ‘शून्य अंक लाने वाले सरकारी सेवा के योग्य कैसे?’

राजस्थान हाईकोर्ट में आज (5 मार्च 2026) चतुर्थ श्रेणी (ग्रुप-डी) भर्ती से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान बेहद चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। जस्टिस आनंद शर्मा ने आरक्षित वर्ग के लिए तय की गई 0.0033 जैसी नाममात्र की कट-ऑफ पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी सेवाओं के लिए योग्यता के न्यूनतम मानकों की इस तरह अनदेखी करना “स्तब्ध करने वाला” है। अदालत ने सवाल उठाया कि क्या शून्य या नकारात्मक अंक लाने वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा के योग्य माना जा सकता है?

प्रमुख सचिव से मांगा हलफनामा, 9 मार्च को अगली सुनवाई ।

अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि भर्ती नियमों में न्यूनतम उत्तीर्ण अंक (Minimum Passing Marks) का प्रावधान क्यों नहीं रखा गया और कट-ऑफ इतने निचले स्तर पर कैसे पहुँच गई। कोर्ट ने संकेत दिया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो पूरी चयन प्रक्रिया पर सख्त आदेश दिए जा सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को होगी।


ग्रुप-डी भर्ती विवाद: मुख्य बिंदु (Table)

विवरणजानकारी
विवादित कट-ऑफ0.0033 अंक
कुल पद5670 (चतुर्थ श्रेणी)
हाईकोर्ट के जजजस्टिस आनंद शर्मा
अगली सुनवाई9 मार्च 2026
विवाद का कारणन्यूनतम पासिंग मार्क्स का न होना

याचिकाकर्ता का तर्क: माइनस अंक पर अयोग्यता क्यों?

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब एक अभ्यर्थी, जिसके अंक शून्य से भी कम (Negative) थे, की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई। उसने कोर्ट में तर्क दिया कि जब विभाग ने कोई न्यूनतम पासिंग मार्क्स तय ही नहीं किए, तो उसे अयोग्य कैसे ठहराया जा सकता है? इसी याचिका की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कुछ श्रेणियों में चयन का पैमाना महज 0.0033 अंक रह गया है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी:

“सरकारी नौकरी में भर्ती केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। अगर हम उन लोगों को चुन रहे हैं जो परीक्षा में न्यूनतम स्तर भी हासिल नहीं कर पाए, तो यह पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर बड़ा सवाल है।”

भर्ती प्रक्रिया और भविष्य की चुनौतियां ।

प्रदेश में कुल 5670 पदों के लिए यह भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जिसकी मुख्य परीक्षाएं अप्रैल 2026 में प्रस्तावित हैं। इसी बीच जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का भी हवाला दिया गया है, जिसमें मेरिट वाले आरक्षित उम्मीदवारों को जनरल केटेगरी में शामिल करने की बात कही गई थी। अब हाईकोर्ट के इस रुख के बाद राज्य में चल रही अन्य सरकारी भर्तियों में भी ‘न्यूनतम मानक’ तय करने की मांग तेज हो सकती है।


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