राजस्थान की भजनलाल सरकार ने सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले ठेकेदारों और भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ को तोड़ने के लिए एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। अब तक निर्माण कार्यों (Works) की निविदाओं में जो ‘दर औचित्यता’ (Rate Justification) बंद लिफाफों के भीतर फाइलों में दबकर रह जाती थी, उसे अब सार्वजनिक खरीद प्रणाली के नए SHPP पोर्टल पर डिजिटल रूप से दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है।
क्या है ये नया फरमान?
वित्त विभाग (वित्तीय नियम) द्वारा जारी ताजा परिपत्र (क्रमांक: प.4 (9) वित्त/साविलेनि/2026) के अनुसार, राज्य सरकार एक सिंगल होलिस्टिक प्रोक्योरमेंट पोर्टल (SHPP) विकसित कर रही है। इस पोर्टल पर अब खुली निविदाओं (Open Tenders) के लिए तकनीकी और वित्तीय बोली के साथ-साथ ‘रेट जस्टिफिकेशन’ का विवरण भी अपलोड करना होगा।
क्यों जरूरी था ये कदम? (अंदर की बात)
सूत्रों की मानें तो अक्सर निर्माण कार्यों में चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए दरों के साथ हेरफेर की आशंका बनी रहती थी:
- पारदर्शिता का अभाव: वर्तमान व्यवस्था में रेट जस्टिफिकेशन को बंद लिफाफे में रखा जाता था, जिससे बाहरी जांच की गुंजाइश कम रहती थी।
- डिजिटल लॉक: नए आदेश के तहत, तकनीकी बिड खुलने से पहले ही यह विवरण पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
- कड़ी निगरानी: हालांकि यह विवरण वित्तीय बोली खुलने के बाद ही विभाग को दिखाई देगा, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड होने के कारण बाद में इसमें कोई भी “बैकडेट” बदलाव मुमकिन नहीं होगा।
सख्त निर्देश: लापरवाही पड़ेगी भारी
शासन सचिव (वित्त बजट) राजन विशाल के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश में साफ कर दिया गया है कि सभी उपापन संस्थाओं (Procuring Entities) को पोर्टल पर प्रावधान उपलब्ध होते ही इसे अनिवार्य रूप से लागू करना होगा। इसकी प्रतिलिपि मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर सभी मुख्य अभियंताओं और एनआईसी (NIC) के अधिकारियों को भेज दी गई है ताकि कोई बहानेबाजी न चले।
अब देखना यह है कि क्या यह डिजिटल व्यवस्था उन रसूखदार ठेकेदारों पर लगाम लगा पाएगी जो अफसरों के साथ मिलकर सरकारी बजट को चूना लगाते हैं? या फिर इस नए पोर्टल में भी भ्रष्टाचार के नए ‘लूपहोल्स’ ढूंढ लिए जाएंगे?
