जालोर: राजस्थान में पीटीआई भर्ती परीक्षा-2022 (PTI Recruitment 2022) में फर्जी डिग्रियों के खेल का पर्दाफाश करते हुए एसओजी (SOG) ने नित नए खुलासे किए हैं । जांच के दौरान चूरू की ओपीजेएस यूनिवर्सिटी (OPJS University) द्वारा रिकॉर्ड जलने की कहानी पूरी तरह फर्जी पाई गई है । एसओजी राजगढ़ यूनिट ने अब विवि प्रबंधन और 47 अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी है ।
रिकॉर्ड रूम नहीं, गेट पर लगी थी आग
एसओजी की जांच में सामने आया कि जब यूनिवर्सिटी से वर्ष 2018 और 2019 का बीपीएड रिकॉर्ड मांगा गया, तो प्रबंधन ने बहाना बनाया कि रिकॉर्ड रूम में लगी आग में दस्तावेज जल गए हैं । हालांकि, अनुसंधान में पता चला कि 28 दिसंबर 2019 को आग रिकॉर्ड रूम में नहीं, बल्कि मुख्य गेट के पास बने बुक स्टोर में लगी थी । मुख्य बिल्डिंग से बुक स्टोर की दूरी करीब 50 मीटर है, जिससे रिकॉर्ड के नष्ट होने का दावा पूरी तरह झूठा साबित हुआ है ।
गड़बड़ी का गणित: 500 की जगह दीं 1359 डिग्रियां
पीटीआई भर्ती में ओपीजेएस विवि से बीपीएड डिग्रीधारक 1359 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था । एनसीटीई (NCTE) के अनुसार विवि के पास प्रति वर्ष केवल 100 सीटों की ही मान्यता थी । इस हिसाब से सत्र 2022 तक अधिकतम 500 डिग्रीधारक ही पात्र हो सकते थे । जांच में स्पष्ट हुआ है कि विवि ने बिना किसी नियमित प्रक्रिया के बैक डेट में फर्जी डिग्रियां बांटी हैं।
25 हजार फर्जी डिग्रियों का रहस्य बरकरार
जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी (Jodhpur National University) का बहुचर्चित डिग्री कांड एक दशक बाद भी अनसुलझा है । एसओजी की कार्रवाई के बावजूद करीब 25 हजार फर्जी डिग्रियां आज कहां हैं, इसका किसी के पास जवाब नहीं है । ये डिग्रियां न तो रद्द की गईं और न ही नष्ट की गईं, जिससे इनके भविष्य में दुरुपयोग का खतरा बना हुआ है ।
संस्कृत यूनिवर्सिटी में भी सीटों से अधिक एडमिशन
जगदगुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में भी फर्जीवाड़ा सामने आया है । यहां पीजीडीसीए और पीजीडीवाईटी कोर्स में तय 400 सीटों के स्थान पर 682 छात्रों को परीक्षा में बैठा दिया गया । यूनिवर्सिटी ने दोषी कॉलेजों पर केवल जुर्माना लगाकर 282 ‘अवैध’ डिग्रियों पर मुहर लगा दी है ।
