Sunday, March 22, 2026
राजधानी"यह सनातन के ध्वज वाली सरकार है", आमागढ़ किले के रास्ते पर जवाब देते हुए बोले वन मंत्री; सदन में जमकर हुआ हंगामा

“यह सनातन के ध्वज वाली सरकार है”, आमागढ़ किले के रास्ते पर जवाब देते हुए बोले वन मंत्री; सदन में जमकर हुआ हंगामा

जयपुर। राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान जयपुर के ऐतिहासिक आमागढ़ किले का मुद्दा गरमा गया। किले तक रास्ता बनाने के सवाल पर शुरू हुई चर्चा देखते ही देखते वैचारिक मतभेद और तीखी बहस में बदल गई। उपनेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा और वन राज्य मंत्री संजय शर्मा के बीच हुई इस नोकझोंक पर स्पीकर वासुदेव देवनानी को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने सदन की कार्यवाही पर कड़ी नाराजगी जताई।

“यह सनातन के ध्वज की सरकार है”

बहस की शुरुआत तब हुई जब रामकेश मीणा ने आमागढ़ किले तक रास्ता बनाने का सवाल पूछा। जवाब देते हुए वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि यह सरकार सनातन के ध्वज को लेकर चलने वाली सरकार है और आमागढ़ तक रास्ता जरूर बनाया जाएगा। उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय मौजूदा मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा को वहां ध्वज फहराने से रोका गया था। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि वन विभाग रास्ते का मेंटेनेंस करेगा और प्राचीन मंदिरों का संरक्षण होगा।

RSS के जिक्र पर भड़का सत्तापक्ष

मंत्री के जवाब पर पलटवार करते हुए रामकेश मीणा ने कहा कि उस समय उन्होंने ही आंदोलन किया था। मीणा ने आरोप लगाया कि “आमागढ़ किले पर आरएसएस (RSS) के लोगों ने भगवा झंडा फहरा दिया था।” जैसे ही मीणा ने आरएसएस का नाम लिया, भाजपा विधायक और मंत्री अपनी सीटों पर खड़े हो गए और कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। सदन में शोर-शराबा और हंगामा शुरू हो गया।

‘हिंदू बनाम आदिवासी’ पर निजी हमला

विवाद बढ़ता देख वन मंत्री संजय शर्मा ने रामकेश मीणा के पुराने बयानों को याद दिलाते हुए पलटवार किया। शर्मा ने कहा कि मीणा ने पूर्व में खुद को हिंदू मानने से इनकार किया था और आदिवासी बताते हुए हिंदू धर्म की कमियों का जिक्र किया था। इस निजी हमले के बाद सदन में गहमागहमी और बढ़ गई।

स्पीकर देवनानी की कड़ी चेतावनी

सदन की मर्यादा टूटते देख स्पीकर वासुदेव देवनानी ने बेहद तल्ख लहजे में दोनों पक्षों को फटकार लगाई। देवनानी ने कहा:

“यह बर्दाश्त नहीं होगा। प्रश्नकाल को प्रश्नकाल ही रहने दीजिए, इसे विवाद का अखाड़ा न बनाएं। जब अध्यक्ष खड़ा हो, तो सबको बैठ जाना चाहिए, लेकिन आप लोग आपस में बोले जा रहे हैं। बिना वजह विवाद की इजाजत नहीं दी जा सकती।”

गौरतलब है कि इससे पहले कानून मंत्री जोगाराम पटेल और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच भी किसी मुद्दे पर नोकझोंक हुई थी, जिससे मंगलवार को सदन का माहौल काफी गर्माया रहा।

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