राजस्थान के सरहदी जिले श्रीगंगानगर में नशे के सौदागरों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की तैयारी पूरी हो चुकी है। जिला पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. अमृता दुहन के नेतृत्व में हुई 10 घंटे लंबी मैराथन बैठक के बाद, पुलिस ने अब पंजाब और हरियाणा में छिपे ड्रग्स माफियाओं की जड़ों पर प्रहार करने का फैसला किया है।
सीमा पार जाकर होगी आर्थिक नाकेबंदी पुलिस की नई रणनीति के तहत, श्रीगंगानगर में नशे की सप्लाई करने वाले बाहरी राज्यों के माफियाओं को चिह्नित किया गया है। पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की धारा 68 के तहत इन तस्करों द्वारा तस्करी से अर्जित की गई चल-अचल संपत्तियों को संबंधित राज्यों में जाकर फ्रीज (Freeze) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें उनके आलीशान मकान, कृषि भूमि, लग्जरी वाहन और बैंक खाते शामिल हैं।
विशेष पुलिस दल गठित: दूसरे राज्यों में जाकर संपत्तियों की पहचान और कानूनी जब्ती के लिए विशेष ‘एसेट ट्रेसिंग यूनिट’ का गठन किया गया है।
- करोड़ों का लक्ष्य: पुलिस का लक्ष्य अगले एक महीने में 5 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति को फ्रीज करना है।
- ड्रोन तस्करी पर पैनी नजर: सरहद पार से ड्रोन के जरिए होने वाली तस्करी को रोकने के लिए सीमावर्ती गांवों में पुलिस ने अपना खुफिया तंत्र मजबूत किया है।
पुलिस की ‘नशा मुक्ति चौपाल’ और जन-भागीदारी एसपी ने आदेश दिए हैं कि केवल कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि समाज से नशे को जड़ से मिटाना होगा। इसके लिए जिले के ‘हॉटस्पॉट’ (जहाँ नशाखोरी अधिक है) क्षेत्रों में ‘पुलिस चौपाल’ लगाई जाएगी। इन चौपालों में पुलिस अधिकारी सीधे ग्रामीणों और युवाओं से संवाद करेंगे। एसपी ने अपना CUG नंबर (8764513201) भी सार्वजनिक किया है, जिस पर कोई भी व्यक्ति नशा तस्करों की सूचना गुप्त रूप से दे सकता है।
अपराधियों के लिए सख्त संदेश बैठक में स्पष्ट किया गया कि लूट, चोरी और संगठित अपराध में लिप्त टॉप-10 अपराधियों और हिस्ट्रीशीटरों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई (जैसे राजपासा) की जाएगी। पुराने और लंबित मामलों को मार्च 2026 तक निपटाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
