Saturday, March 21, 2026
राजधानीबारां-झालावाड़ के लिए खुशखबरी: परवन परियोजना की नई DPR अंतिम चरण में, विधानसभा में बोले मंत्री सुरेश सिंह रावत

बारां-झालावाड़ के लिए खुशखबरी: परवन परियोजना की नई DPR अंतिम चरण में, विधानसभा में बोले मंत्री सुरेश सिंह रावत

जयपुर: राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में शुक्रवार को जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने परवन सिंचाई परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार गरीब कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन किसानों को भी मुआवजा दे रही है, जो चारागाह, वन या सरकारी भूमि पर बिना वैध दस्तावेजों के बसे हुए थे।

45 करोड़ से अधिक का मुआवजा वितरित

प्रश्नकाल के दौरान विधायक राधेश्याम बैरवा के सवाल का जवाब देते हुए सुरेश सिंह रावत ने बताया कि पिछले दो वर्षों में सरकार ने भूमि अवाप्ति के विरुद्ध लगभग 45 करोड़ 65 लाख रुपये की राशि मुआवजे के तौर पर मंजूर की है। इसके तहत पात्र किसानों को चेक वितरित किए जा रहे हैं। मंत्री ने सदन में कहा कि पिछली सरकार ने इन श्रेणी के किसानों के लिए मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं किया था, जिसे वर्तमान सरकार ने लागू किया है।

इन क्षेत्रों को मिलेगा सिंचाई का लाभ (DPR अपडेट)

बारां और झालावाड़ जिले के उन गांवों के लिए भी अच्छी खबर है जो अब तक इस परियोजना से वंचित थे। मंत्री ने बताया कि:

  • बारां जिला: अटरू और छबड़ा विधानसभा क्षेत्र के वंचित गांव।
  • झालावाड़ जिला: खानपुर विधानसभा क्षेत्र के गांव। इन क्षेत्रों को सिंचाई सुविधा से जोड़ने के लिए बजट 2025-26 में घोषित की गई डीपीआर (DPR) का कार्य अब अंतिम चरण में है। अधिकारियों को इसे जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

अटरू तहसील: मुआवजे का गणित

मंत्री ने अटरू तहसील में दायीं मुख्य नहर के निर्माण से जुड़े आंकड़े भी पेश किए:

  • अवाप्त भूमि: 685 खातेदारों की भूमि अवाप्त की गई है।
  • भुगतान: अधिकांश काश्तकारों को मुआवजा दिया जा चुका है।
  • अदालती मामले: 36 किसानों के प्रकरण अभी न्यायालय में लंबित हैं, जिनका भुगतान फैसले के बाद होगा।
  • विशेष अनुग्रह: 20 खातेदारों को विशेष अनुग्रह राशि के चेक देने की प्रक्रिया चल रही है।
  • अतिरिक्त मामले: छूटे हुए 86 खातेदारों के लिए भूमि अर्जन अधिनियम 2013 के तहत कार्यवाही जारी है।

मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार का लक्ष्य परवन परियोजना के कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करना और हर प्रभावित को उचित हक दिलाना है।

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