Sunday, March 22, 2026
अजमेरतबीजी किसान मेला 2026: मसालों की तकनीक से महकेगी किसानों की तकदीर

तबीजी किसान मेला 2026: मसालों की तकनीक से महकेगी किसानों की तकदीर

अजमेर: राजस्थान के अजमेर (तबीजी) स्थित राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान संस्थान में शनिवार को आयोजित ‘किसान मेला एवं औद्योगिक संगोष्ठी’ में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने शिरकत की। उन्होंने घोषणा की कि बीजीय मसालों (जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी, अजवाइन) के क्षेत्र में आधुनिक अनुसंधान और प्रसंस्करण (Processing) से किसानों की आय में क्रांतिकारी वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही मसालों की भूमि रहा है और अब समय आ गया है कि हम अपनी गुणवत्ता और सुगंध के दम पर वैश्विक निर्यात बाजार पर कब्जा करें।

कोटा बनेगा धनिया का हब और नागौरी मेथी को मिलेगी नई पहचान

समारोह में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट ने एक बड़ा रोडमैप पेश किया। उन्होंने कहा कि धनिया के बीजों के आयात को कम करने के लिए राजस्थान के कोटा जिले को ‘धनिया बीज हब’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही, राजस्थान की प्रसिद्ध नागौरी पान मेथी और सूखी लाल मिर्च को भी अब स्थानीय अनुसंधान की सूची में शामिल किया जा रहा है, जिससे इनकी नई और बेहतर किस्में तैयार की जा सकेंगी। डॉ. जाट ने अजमेर में प्राकृतिक जैविक मसाला उत्पादन का उत्कृष्ट केंद्र बनने की संभावनाओं पर भी बल दिया।


मसाला अनुसंधान मेला 2026: मुख्य आकर्षण (Table)

परियोजना/घोषणाविवरणमुख्य लक्ष्य
कोटा धनिया हबधनिया बीज उत्पादन का मुख्य केंद्रबीज आयात को शून्य करना
नागौरी पान मेथी शोधस्थानीय मेथी किस्मों पर वैज्ञानिक अनुसंधानगुणवत्ता और उपज बढ़ाना
जोधपुर जीरा क्लस्टरजीरा उत्पादन के लिए विशेष क्लस्टर निर्माणनई प्रजातियों का प्रदर्शन
जलवायु प्रतिरोधी किस्मेंक्षारीय, गर्मी और अम्लीय प्रतिरोधी बीजखराब मिट्टी में भी बम्पर पैदावार
बीज प्रसंस्करण सुविधातबीजी केंद्र में नई यूनिट का उद्घाटनकिसानों को आधुनिक बीज उपलब्ध कराना

मिट्टी की समस्या और समाधान पर मंथन

संगोष्ठी के दौरान वैज्ञानिकों ने चिंता जताई कि वर्तमान में खेती की जमीन सामान्य से क्षारीय या अम्लीय प्रकृति की होती जा रही है। इससे निपटने के लिए संस्थान ऐसी नई किस्में विकसित कर रहा है जो तेज गर्मी, अधिक क्षार और अम्लीय मिट्टी में भी बेहतर उत्पादन दे सकें। स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. पी. एस. चौहान और धानुका एग्रीटेक के डॉ. आर.जी. अग्रवाल ने सुझाव दिया कि उद्योगों को सीधे किसानों से जुड़ना चाहिए, ताकि किसान मांग के अनुसार फसलें उगा सकें और उन्हें सीधे बाजार मिल सके।

किसानों को मिला सम्मान और तकनीकी सौगात

केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने कार्यक्रम के दौरान बीज प्रसंस्करण सुविधा का उद्घाटन किया और प्रगतिशील किसानों व वैज्ञानिकों को सम्मानित किया। उन्होंने तकनीकी पुस्तिकाओं का विमोचन कर किसानों को उन्नत बीजों के पैकेट भी वितरित किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और फसल बीमा जैसी योजनाओं के साथ अब ‘वैल्यू एडिशन’ (मूल्य संवर्धन) पर ध्यान देना होगा, ताकि किसान केवल कच्चा माल न बेचकर उसका पाउडर या तेल बनाकर अधिक मुनाफा कमा सकें।

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