जयपुर राजधानी जयपुर के टोंक रोड स्थित एयरपोर्ट प्लाजा स्कीम (Airport Plaza Scheme) की करीब 1500 करोड़ रुपए की बेशकीमती जमीन के मामले में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जेडीए की विशेष अपील को खारिज करते हुए प्रार्थी कंपनी ‘साई दर्शन होटल्स एंड मोटल्स’ के पक्ष में 9000 वर्गमीटर (अधिग्रहित भूमि का 15 फीसदी) विकसित जमीन का आवंटन आदेश तत्काल जारी करने के निर्देश दिए हैं।
एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए एकलपीठ के 6 अगस्त 2009 के आदेश को बरकरार रखा है और उसमें किसी भी तरह के दखल से इनकार कर दिया है।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां: क्यों हारा जेडीए?
खंडपीठ ने जेडीए की दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:
- वादों से नहीं मुकर सकती सरकार: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अपने ही निर्णयों से पीछे नहीं हट सकती, खासकर तब, जब संबंधित पक्ष (प्रार्थी) ने उन आदेशों पर भरोसा करके अपनी तरफ से सभी मुकदमे वापस ले लिए हों।
- मुआवजे का सही अर्थ: कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जेडीए कई सालों से इस जमीन का उपयोग कर रहा है, जबकि मूल मालिकों या उनके उत्तराधिकारियों को उचित मुआवजा तक नहीं मिला। “केवल कोर्ट में राशि जमा करा देना ही भुगतान नहीं माना जा सकता।”
- 15% विकसित भूमि का अधिकार: राज्य सरकार की 2001 की नीति के अनुसार, प्रभावित पक्ष 15 फीसदी विकसित भूमि प्राप्त करने का अधिकारी है।
भ्रष्टाचार और अवैध आवंटन की JDA की दलीलें खारिज
जेडीए की ओर से कोर्ट में दलील दी गई थी कि इस जमीन का आवंटन अवैध तरीके से हुआ है और इससे सरकारी खजाने को भारी आर्थिक नुकसान होगा। जेडीए ने मामले में भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए थे। हालांकि, खंडपीठ ने इन सभी दलीलों को अस्वीकार कर दिया और कहा कि इस जमीन के मामले में जो भी आदेश पारित किए गए थे, वे राज्य सरकार की नीति के पूर्णतः अनुरूप और वैध हैं।
क्या है 1500 करोड़ की जमीन का पूरा विवाद? (Timeline)
यह विवाद दशकों पुराना है, जिसकी शुरुआत 1969 से हुई थी:
- 21 अगस्त 1969: राज्य सरकार ने सांगानेर तहसील क्षेत्र की इस जमीन के अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी की।
- 9 अप्रैल 1981: अंतिम अवार्ड पारित कर मुआवजे की राशि कोर्ट में जमा करवाई गई, लेकिन खातेदारों ने राशि बढ़ाने का दावा किया जो लंबित रहा।
- 12 सितंबर 1982: जेडीए के अस्तित्व में आने के बाद उसने अधिसूचना जारी कर जमीन का कब्जा ले लिया।
- अधिकारों का हस्तांतरण: प्रार्थी ‘साई दर्शन होटल्स’ ने खातेदारों के असाइनी से भूमि अधिकार प्राप्त कर लिए और हाईकोर्ट का रुख किया।
- मई 2003: प्रार्थी ने मुक़दमे वापस लिए। 12 और 19 मई 2003 को राज्य सरकार ने 15% विकसित जमीन आवंटन के आदेश दिए।
- जून 2009: अचानक 23 जून 2009 को सरकार ने अपने ही दोनों आवंटन आदेशों को स्थगित कर दिया, जिसके बाद यह कानूनी लड़ाई फिर शुरू हुई, जो अब प्रार्थी के पक्ष में खत्म हुई है।
