जयपुर: राजधानी जयपुर में फर्जी पट्टे बांटने वाली गृह निर्माण सोसायटियों (Housing Societies) के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाई कोर्ट के निर्देश पर बनी एक हाई लेवल कमेटी ने जिन सोसायटियों को दोषी माना था और जिन पर सरकार ने केस दर्ज कराया था, पुलिस ने उनमें से 7 मामलों में फाइनल रिपोर्ट (FR) लगाकर फाइल ही बंद कर दी है।
ऐसे में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि जब पुलिस सरकार और हाई कोर्ट के निर्देशों से बनी कमेटी की ही नहीं सुन रही है, तो आम आदमी न्याय के लिए कहां गुहार लगाए?
क्या है पूरा मामला?
हाई कोर्ट के निर्देश पर जयपुर में फर्जी पट्टे बांटने वाली सोसायटियों पर कार्रवाई के लिए जेडीए (JDA), पुलिस और सहकारिता विभाग की एक संयुक्त टीम बनाई गई थी।
- टीम ने उन सोसायटियों पर कार्रवाई की जिनका लिक्विडेशन (Liquidation) हो चुका था या संचालन सहकारिता विभाग के पास था।
- इसके बावजूद ये सोसायटियां धड़ल्ले से फर्जी पट्टे काट रही थीं।
- संयुक्त टीम ने छापे मारकर रिकॉर्ड जब्त किए और 8 सोसायटियों पर केस दर्ज कराया।
- लेकिन पुलिस ने इन मामलों को ‘गलतफहमी’ या ‘सिविल नेचर’ का बताकर 7 मामलों में FR (Final Report) लगा दी और आरोपियों को क्लीन चिट दे दी।
4 थानों ने की जांच: किसी ने बताया ‘झूठ’, किसी ने ‘गलतफहमी’
पुलिस के अलग-अलग थानों ने जांच में आरोपियों को बचाने के लिए अजीबोगरीब तर्क दिए:
1. झोटवाड़ा थाना (4 सोसायटियों पर FIR, बताया गलतफहमी):
- FIR 973-2022 (विश्वकर्मा गृह निर्माण समिति): 2015 में लिक्विडेशन के बाद भी पट्टे कटे। पुलिस ने नवंबर 2024 में FR लगा दी।
- FIR 976-2022 (रामनगर गृह निर्माण सहकारी समिति): 16 पट्टों में फर्जीवाड़ा मिला, पुलिस ने ‘गलतफहमी’ बताते हुए जून 2024 में FR लगाई।
- FIR 975-2022 (शिव गृह निर्माण): 79 पट्टों में फर्जीवाड़ा, जून 2024 में FR।
- FIR 978-2022 (नवजीवन गृह निर्माण): अक्टूबर 2024 में FR लगा दी गई।
2. अन्य थानों का हाल:
- बजाज नगर थाना (FIR 370-2023): इन्द्रप्रस्थ गृह निर्माण समिति के मामले को ‘झूठा’ बताते हुए FR लगा दी।
- विधायकपुरी थाना (FIR 106-2023): नवजीवन हाउसिंग सोसायटी के मामले में सितंबर 2024 में FR लगाई।
- गांधी नगर थाना (FIR 429-2023): वैशाली गृह निर्माण समिति के रिकॉर्ड गायब होने पर इसे ‘सिविल नेचर’ का बताकर मामले को रफा-दफा कर दिया।
- जवाहर सर्किल थाना (FIR 626): रामराजपूत गृह निर्माण समिति के मामले में पुलिस ने दो बार जांच बदली, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
हाई लेवल कमेटी की मेहनत पर फिरा पानी
सहकारिता विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त रजिस्ट्रार (अपील) द्वारा 2018 में हाई कोर्ट के निर्देश पर एक कमेटी बनाई गई थी, जिसमें जेडीए, पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारी शामिल थे। इस कमेटी ने गहन जांच के बाद मामले दर्ज कराए थे, लेकिन पुलिस की इस कार्यप्रणाली ने पूरी जांच पर ही पानी फेर दिया है।
