Saturday, March 21, 2026
राजस्थानCyber Alert: FASTag एनुअल पास बनवाने जा रहे हैं? सावधान! गूगल पर 'नंबर 1' दिखने वाली वेबसाइट कर सकती है कंगाल

Cyber Alert: FASTag एनुअल पास बनवाने जा रहे हैं? सावधान! गूगल पर ‘नंबर 1’ दिखने वाली वेबसाइट कर सकती है कंगाल

जयपुर: अगर आप अपने वाहन के लिए नेशनल हाईवे (NHAI) का ‘FASTag एनुअल पास’ बनवाने या रिन्यू करने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। साइबर ठगों ने अब गूगल सर्च इंजन का सहारा लेकर लोगों को ठगने का नया और हाई-टेक तरीका निकाल लिया है। राजस्थान पुलिस के महानिदेशक (साइबर क्राइम) संजय अग्रवाल ने इसे लेकर एक विशेष एडवाइजरी जारी की है।

गूगल के ‘Top Result’ में छिपा है ठगी का जाल डीजीपी श्री अग्रवाल ने बताया कि आम तौर पर लोग गूगल पर सर्च करने पर सबसे ऊपर आने वाले लिंक को ही असली मान लेते हैं। साइबर अपराधी इसी भरोसे का फायदा उठा रहे हैं। वे Google Ads और SEO (सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन) का इस्तेमाल कर अपनी फर्जी वेबसाइटों को सर्च रिजल्ट में सबसे ऊपर (Rank 1) दिखा रहे हैं। इन वेबसाइटों का डिजाइन, लोगो और इंटरफेस बिल्कुल असली NHAI पोर्टल जैसा होता है, जिससे आम आदमी आसानी से झांसे में आ जाता है।

ऐसे होता है खेल: 3000 रुपये की मांग और क्यूआर कोड पुलिस की जांच में सामने आया है कि ये फर्जी वेबसाइटें वार्षिक पास (Annual Pass) के नाम पर करीब 3000 रुपये की मांग करती हैं।

  • भुगतान के लिए वहां एक क्यूआर कोड (QR Code) दिया जाता है।
  • स्कैन करते ही पैसा किसी सरकारी खाते (Government Account) में जाने के बजाय अपराधियों के ‘म्यूल अकाउंट’ (किराए के खाते) में चला जाता है।
  • अक्सर पेमेंट के समय किसी व्यक्ति विशेष का नाम (जैसे- “सरिता देवी” या अन्य) दिखाई देता है, जबकि सरकारी भुगतान कभी भी निजी नाम पर नहीं होते।

असली और नकली की पहचान कैसे करें? पुलिस ने सुरक्षित रहने के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स दिए हैं:

  1. सही ऐप: पास के लिए केवल आधिकारिक ऐप ‘Rajmarg Yatra’ या अधिकृत बैंक पोर्टल का ही इस्तेमाल करें।
  2. URL चेक करें: annualtollpass.com या annualtollpasss.com जैसे संदिग्ध डोमेन से बचें। आधिकारिक वेबसाइट हमेशा .gov.in या NHAI के डोमेन पर होती है।
  3. रिसीवर का नाम: पेमेंट करते समय अगर किसी व्यक्ति का नाम आए, तो तुरंत रुक जाएं।

ठगी होने पर क्या करें? यदि आप ऐसे किसी स्कैम का शिकार हो गए हैं, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा राजस्थान पुलिस के विशेष नंबर 9256001930 या 9257510100 पर संपर्क करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

Check out our other content

Check out other tags:

Most Popular Articles