Friday, March 20, 2026
जयपुरमिशन बंगाल: कैलाश चौधरी के नेतृत्व में उतरे राजस्थान के धुरंधर, संगठन विस्तार और बूथ मैनेजमेंट पर जोर

मिशन बंगाल: कैलाश चौधरी के नेतृत्व में उतरे राजस्थान के धुरंधर, संगठन विस्तार और बूथ मैनेजमेंट पर जोर

जयपुर। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का बिगुल बजते ही राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ में सेंध लगाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सबसे भरोसेमंद ‘राजस्थान टीम’ को मैदान में उतार दिया है। बीजेपी हाईकमान ने राजस्थान के कई अनुभवी और कद्दावर नेताओं को बंगाल की अलग-अलग विधानसभा सीटों पर इलेक्शन मैनेजमेंट की कमान सौंपी है।

कैलाश चौधरी के नेतृत्व में तैनात हुई ‘मास्टरमाइंड्स’ की टीम

बीजेपी के ‘मिशन बंगाल’ में सबसे प्रमुख नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री और किसान नेता कैलाश चौधरी का है। उनके साथ ही पार्टी ने आक्रामक तेवरों वाले विधायक जितेंद्र गोठवाल, अतुल भंसाली और लादू लाल तेली जैसे धुरंधरों को चुनावी मोर्चे पर तैनात किया है। इन नेताओं को न केवल संगठन विस्तार, बल्कि बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और प्रभावी ‘इलेक्शन मैनेजमेंट’ की जिम्मेदारी दी गई है।

प्रवासी राजस्थानियों पर बीजेपी का बड़ा दांव

पश्चिम बंगाल की दर्जनों ऐसी सीटें हैं जहाँ प्रवासी राजस्थानी (मारवाड़ी समाज) निर्णायक भूमिका में हैं। इन वोटर्स को साधने के लिए बीजेपी ने राजस्थान के नेताओं को एक ‘ब्रिज’ (सेतु) के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना बनाई है। इसी सिलसिले में:

  • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ जल्द ही बंगाल के तूफानी दौरे पर जाएंगे।
  • ये दिग्गज नेता वहाँ आयोजित होने वाले ‘प्रवासी सम्मेलनों’ को संबोधित करेंगे और मारवाड़ी समाज को बीजेपी के पक्ष में लामबंद करेंगे।

मैदान में सक्रिय हुई दिग्गजों की फौज

बीजेपी प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी के अनुसार, राजस्थान के ये अनुभवी नेता अपने-अपने प्रभार वाले क्षेत्रों में सक्रिय हो चुके हैं। इस विशेष टीम में कई अनुभवी नाम शामिल हैं, जिनमें:

  • पूर्व सांसद डॉ. मनोज राजोरिया
  • अशोक सैनी और मोतीलाल मीणा
  • पवन दुग्गल, नीरज जैन और वासुदेव चावला

क्यों अहम है राजस्थान टीम?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजस्थान के नेताओं की संगठनात्मक क्षमता और प्रवासियों से उनका सीधा जुड़ाव बीजेपी के लिए ‘गेम-चेंजर’ साबित हो सकता है। ममता बनर्जी के ‘आउटसाइडर’ (बाहरी) वाले नैरेटिव को काटने के लिए बीजेपी इन राजस्थानी नेताओं के जरिए ‘प्रवासी एकता’ का कार्ड खेल रही है।

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