बेंगलुरु/जयपुर: कर्नाटक की राजधानी बंगलुरू में आयोजित प्रतिष्ठित ‘इंडियन आर्ट हिस्ट्री कांग्रेस’ (Indian Art History Congress) के 33वें वार्षिक अधिवेशन में जयपुर की डॉ. रेनू शाही ने अपने शोध पत्र से सबको प्रभावित किया है। मिथिक सोसाइटी में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश भर से आए 175 विद्वानों के बीच डॉ. शाही का शोध पत्र कौतूहल और चर्चा का विषय बना रहा।
व्यंग्य चित्रकला: एक गंभीर सामाजिक दर्पण 6 से 10 फरवरी, 2026 तक चली इस संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘भारतीय कला में सामाजिक मूल्य’ था। इस विषय पर डॉ. रेनू शाही ने एक अनूठा दृष्टिकोण अपनाते हुए ‘व्यंग्य कला’ (Satire Art) पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।

डॉ. शाही ने अपने शोध में बताया कि कैसे व्यंग्य चित्रकला, कैरिकेचर और कार्टून केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को कलात्मक और तीखे रूप में प्रस्तुत करने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने अपने शोध की पृष्ठभूमि में देश के दिग्गज व्यंग्यकारों और कलाकारों के कार्यों का विश्लेषण किया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- गगनेंद्र नाथ टैगोर
- आर. के. लक्ष्मण
- के. शंकर पिल्लई
- बाल ठाकरे
उनके शोध की उत्कृष्टता और विषय की नवीनता के कारण वहां उपस्थित वरिष्ठ इतिहासकारों और कला समीक्षकों ने उनकी जमकर प्रशंसा की।
डॉ. जामखेडकर को ‘भारती सम्मान’ इस आयोजन में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि रही देश के वरिष्ठ कला इतिहासकार डॉ. अरविंद प्रभाकर जामखेडकर का सम्मान। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) के पूर्व अध्यक्ष और डेक्कन कॉलेज के कुलपति रह चुके डॉ. जामखेडकर को डॉ. पूजा भारती मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा ‘भारती सम्मान’ (लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड) से नवाजा गया।
यह आयोजन भारतीय अनुसंधान इतिहास परिषद और भारतीय कला इतिहास कांग्रेस के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें कला और इतिहास के क्षेत्र में नए शोधों पर मंथन किया गया। जयपुर से डॉ. रेनू शाही की भागीदारी ने प्रदेश का नाम रोशन किया है।
