राजस्थान हाईकोर्ट में मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए हर महीने दो शनिवार को कोर्ट खोलने के प्रशासनिक फैसले के विरोध में वकीलों ने मोर्चा खोल दिया है। आज, 7 फरवरी 2026 को कार्यदिवस घोषित होने के बावजूद, जयपुर और जोधपुर दोनों पीठों में अधिवक्ताओं ने स्वेच्छा से कामकाज का पूर्ण बहिष्कार किया, जिससे अदालती कार्यवाही पूरी तरह ठप रही। यह विवाद दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट की ‘फुल कोर्ट मीटिंग’ में लिए गए उस निर्णय से उपजा है, जिसमें साल भर में 24 अतिरिक्त कार्यदिवस जोड़ने का प्रावधान किया गया था। वकीलों का तर्क है कि यह फैसला उन पर अत्यधिक मानसिक और शारीरिक दबाव डालेगा, साथ ही उनके पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन के संतुलन को भी बिगाड़ेगा।

विवाद ने उस समय और उग्र रूप ले लिया जब बार एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर गठित पांच जजों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तो सौंप दी है, लेकिन उसके निष्कर्षों को वकीलों के साथ साझा नहीं किया गया है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं को अंधेरे में रखकर लिए जा रहे ये निर्णय उन्हें स्वीकार्य नहीं हैं। दूसरी ओर, अदालत ने पूर्व में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि वकीलों का हड़ताल पर जाना आम नागरिकों के त्वरित न्याय के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है। आज के इस सामूहिक बहिष्कार के कारण हजारों मामलों की सुनवाई टल गई है और दूर-दराज से आए पक्षकारों को बैरंग लौटना पड़ा। बार और बेंच के बीच बढ़ते इस तनाव ने न्यायपालिका की सुचारू कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
