Friday, March 20, 2026
राजनीतिराजस्थान में 'दो संतान' और 'शिक्षा' की अनिवार्यता खत्म, चुनाव से पहले सरकार का बड़ा मास्टरस्ट्रोक

राजस्थान में ‘दो संतान’ और ‘शिक्षा’ की अनिवार्यता खत्म, चुनाव से पहले सरकार का बड़ा मास्टरस्ट्रोक

जयपुर: राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की तैयारी कर रहे हजारों दावेदारों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश की भजनलाल सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी चुनावों में उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की कोई अनिवार्यता नहीं रहेगी। विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सरकार ने साफ किया है कि वर्तमान में राजस्थान नगरपालिका अधिनियम या पंचायत राज नियमों के तहत शैक्षणिक योग्यता लागू करने का कोई नया प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब कम पढ़े-लिखे या अनपढ़ व्यक्ति भी पार्षद, सरपंच या जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ सकेंगे। पिछली बार जब शैक्षणिक योग्यता की शर्त हटाई गई थी, तब से इसे दोबारा लागू करने को लेकर काफी असमंजस था, जिसे अब सरकार ने पूरी तरह खत्म कर दिया है।

इसके साथ ही, करीब तीन दशक पुराने ‘दो संतान’ के नियम को लेकर भी सरकार ने ऐतिहासिक रुख अपनाया है। प्रदेश में अब तक नियम था कि 1 जून 2002 के बाद दो से अधिक संतान होने पर व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता था, लेकिन अब सरकार इस पाबंदी को हटाने की तैयारी में है। स्वायत्त शासन विभाग की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर विधि विभाग को भेज दिया गया है। मुख्यमंत्री के स्तर पर अंतिम मुहर लगते ही उन सक्रिय कार्यकर्ताओं का चुनावी रास्ता साफ हो जाएगा जो तीसरी संतान के कारण पिछले कई वर्षों से योग्य होने के बावजूद चुनाव नहीं लड़ पा रहे थे। माना जा रहा है कि सरकार “वन स्टेट, वन इलेक्शन” की रणनीति के तहत पंचायत और निकाय चुनाव एक साथ कराने की योजना बना रही है, जिससे प्रशासनिक खर्च और समय की बचत होगी।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इन बदलावों का व्यापक असर देखने को मिलेगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि शैक्षणिक योग्यता और दो संतान की बाध्यता हटने से ज़मीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ेगी। जहाँ पहले इन नियमों के कारण कई योग्य चेहरे चुनावी दौड़ से बाहर हो जाते थे, वहीं अब अधिक संख्या में लोग लोकतंत्र के इस उत्सव में हिस्सा ले सकेंगे। निर्वाचन विभाग अब नई वोटर लिस्ट और वार्डों के पुनर्गठन की प्रक्रिया में जुटा है। संभावना जताई जा रही है कि मई 2026 के आसपास प्रदेश में चुनावी बिगुल बज सकता है। नियमों में इस ढील के बाद अब गांव की चौपालों और शहरों के राजनीतिक गलियारों में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं और दावेदारों ने अपनी फील्डिंग सजानी शुरू कर दी है।

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