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Home - जयपुर - कचरा फैलाया तो खैर नहीं! राजस्थान हाईकोर्ट का जयपुर नगर निगम को आदेश—लापरवाह जमादारों पर तय हो जिम्मेदारी

जयपुर

कचरा फैलाया तो खैर नहीं! राजस्थान हाईकोर्ट का जयपुर नगर निगम को आदेश—लापरवाह जमादारों पर तय हो जिम्मेदारी

By The Public Hub
Last updated: May 27, 2026
4 Min Read

जयपुर। गुलाबी नगरी और देश की प्रमुख हेरिटेज सिटी जयपुर की बिगड़ती सफाई व्यवस्था को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने जयपुर नगर निगम (ग्रेटर और हेरिटेज) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शहर की सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा-कचरा फेंकने वाले लोगों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उन पर तत्काल जुर्माना (Fine) लगाया जाए, ताकि शहर को साफ-सुथरा रखा जा सके।

Contents
रसूखदारों का खेल खत्म: सफाईकर्मी करेंगे सिर्फ अपना मूल कामगंदगी मिली तो जमादार और स्वास्थ्य निरीक्षक होंगे जिम्मेदारटूरिज्म इंडस्ट्री के लिए पूरे प्रदेश में लागू हो यह मॉडलआम जनता और एनजीओ से भी की विशेष अपील

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने 21 मई को जयपुर शहर की सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

रसूखदारों का खेल खत्म: सफाईकर्मी करेंगे सिर्फ अपना मूल काम

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता विमल चौधरी ने कोर्ट के समक्ष एक गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि नगर निगमों में जितने सफाईकर्मियों की नियुक्तियां हैं, जमीनी स्तर पर उतने कर्मचारी सफाई व्यवस्था के काम में तैनात ही नहीं हैं। कई सफाईकर्मियों ने अपने राजनैतिक व प्रशासनिक रसूख के चलते अपनी ड्यूटी दफ्तरों या हल्के कामों में लगवा रखी है, तो कई कर्मचारियों को अधिकारियों ने अपने व्यक्तिगत या अन्य गैर-सफाई कामों में उलझा रखा है।

इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए खंडपीठ ने नगर निगम प्रशासन को सख्त हिदायत दी कि सभी सफाईकर्मियों को उनके मूल काम यानी केवल और केवल सफाई व्यवस्था में ही तैनात किया जाए।

गंदगी मिली तो जमादार और स्वास्थ्य निरीक्षक होंगे जिम्मेदार

अदालत ने शहर को साफ रखने के लिए जवाबदेही तय करने का एक पारदर्शी फॉर्मूला दिया है:

  • शेड्यूल और इंफ्रास्ट्रक्चर: नगर निगम पूरे शहर के लिए मैन्युअल और मैकेनिकल (मशीनी) दोनों तरीकों से सफाई का एक निर्धारित और कड़ा टाइम-टेबल (शेड्यूल) तैयार करे। इसके अलावा, सभी आवासीय कॉलोनियों के पास जरूरत के अनुसार पर्याप्त संख्या में बड़े डस्टबिन (कचरा पात्र) रखे जाएं।
  • अधिकारियों पर गाज: स्थानीय जमादारों की यह सीधी जिम्मेदारी होगी कि वे इन डस्टबिनों को रोजाना नियमित रूप से खाली और साफ करवाएं।
  • सीधी कार्रवाई: यदि किसी भी इलाके में कचरा फैला हुआ पाया गया या नियमित सफाई नहीं होने की शिकायत मिली, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित क्षेत्र के स्थानीय जमादार या स्वास्थ्य निरीक्षक (Sanitary Inspector) को जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

टूरिज्म इंडस्ट्री के लिए पूरे प्रदेश में लागू हो यह मॉडल

“राजस्थान में पर्यटन (Tourism) सबसे बड़ा उद्योग है और जयपुर इसकी धड़कन है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर राज्य की छवि को बनाए रखने के लिए केवल जयपुर ही नहीं, बल्कि राजस्थान के अन्य सभी प्रमुख शहरों और नगर निकायों में भी सफाई का ऐसा ही कड़ा और प्रभावी मॉडल लागू किया जाना चाहिए।” — राजस्थान हाईकोर्ट

आम जनता और एनजीओ से भी की विशेष अपील

अदालत ने साफ किया कि कोई भी शहर केवल सरकारी प्रयासों या अदालती डंडे से साफ नहीं रह सकता। कोर्ट ने आदेश के माध्यम से जयपुर के नागरिकों से भी भावुक अपील की है कि वे अपनी कॉलोनियों और आसपास के परिवेश को स्वच्छ बनाए रखने के लिए जागरूक बनें। इसके साथ ही, सामाजिक संगठनों (NGOs) से भी आग्रह किया गया है कि वे शहर को सुंदर और कचरा-मुक्त बनाने के इस महाभियान में नगर निगम का बढ़-चढ़कर सहयोग करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 जुलाई 2026 की तारीख तय की है, जिससे पहले निगम को अपनी एक्शन रिपोर्ट पेश करनी होगी।

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