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Home - अपराध - सरकारी दावों की खुली पोल: 20 साल से बंद कुआं, सूखा जीएलआर; बाड़मेर के गादान गांव में पेयजल योजना का निकला दम

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सरकारी दावों की खुली पोल: 20 साल से बंद कुआं, सूखा जीएलआर; बाड़मेर के गादान गांव में पेयजल योजना का निकला दम

By The Public Hub
Last updated: May 21, 2026
5 Min Read

जयपुर: राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में लंबे समय से चल रहे अवैध खनन के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि अदालत केवल सरकार की कागजी योजनाओं, वादों और शपथ पत्रों से संतुष्ट नहीं होने वाली है, बल्कि वास्तविक और प्रभावी प्रगति जमीन पर दिखाई देनी चाहिए। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अवैध खनन को पूरी तरह रोकने के लिए इसके पीछे बैठे ‘बड़े खिलाड़ियों’ (माफियाओं) को पकड़ना होगा, सिर्फ अवैध वाहनों के गरीब ड्राइवरों और चालकों को पकड़ने से यह खेल बंद नहीं होने वाला है।

Contents
राजस्थान के प्रयासों की सराहना, कहा- ‘दूसरों के लिए रोल मॉडल बनेगा यह सिस्टम’अदालत में मौजूद रहे आला अफसरवन विभाग का प्लान: 40 संवेदनशील जगहों पर एआई (AI) कैमरों से होगी निगरानीखान और परिवहन विभाग का दावा: 31 जुलाई तक लग जाएंगे सभी वाहनों में GPS

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने चंबल में अवैध खनन पर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान (Suo Motu) मामले की सुनवाई करते हुए यह अहम निर्देश दिए। इसके साथ ही, कोर्ट ने राज्य सरकार को वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए रिक्त पड़े फॉरेस्ट गार्ड, रेंजर्स और फील्ड स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

राजस्थान के प्रयासों की सराहना, कहा- ‘दूसरों के लिए रोल मॉडल बनेगा यह सिस्टम’

कड़ी हिदायत देने के साथ ही, माननीय अदालत ने राजस्थान सरकार द्वारा अवैध खनन को रोकने के लिए तैयार किए जा रहे नए तकनीकी ढांचे की सराहना भी की। अदालत ने कहा कि अवैध खनन को रोकने के लिए राजस्थान ने जो इंटीग्रेटेड मॉडल विकसित किया है, वह भविष्य में देश के दूसरे राज्यों के लिए भी एक बेहतरीन नजीर (रोल मॉडल) बन सकता है।

अदालत में मौजूद रहे आला अफसर

सुनवाई की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोर्ट में एसीएस (होम), एसीएस (वन व पर्यावरण), एसीएस (खान एवं पेट्रोलियम), प्रमुख परिवहन सचिव, सीनियर पुलिस अधिकारी, पीसीसीएफ और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और एएजी शिव मंगल शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि 14 मई 2026 को दिए गए कोर्ट के पिछले आदेश के बाद मुख्य सचिव (CS) ने सभी संबंधित विभागों को आपस में बेहतर समन्वय के साथ काम करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

वन विभाग का प्लान: 40 संवेदनशील जगहों पर एआई (AI) कैमरों से होगी निगरानी

वन विभाग ने अदालत को अपनी कार्ययोजना सौंपते हुए बताया कि चंबल अभयारण्य क्षेत्र के भीतर अवैध खनन से सबसे ज्यादा प्रभावित 40 संवेदनशील स्थानों (Hotspots) की पहचान पूरी कर ली गई है।

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मॉनिटरिंग: इन सभी 40 जगहों पर एआई-आधारित हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी निगरानी प्रणाली (CCTV Surveillance System) स्थापित की जाएगी।
  • कमांड सेंटर से लिंकेज: इन कैमरों को रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए मुख्य कंट्रोल रूम और कमांड सेंटर से सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे कहीं भी अवैध गतिविधि होने पर तुरंत एक्शन लिया जा सके।
  • वाहन ट्रैकिंग: अवैध खनन में लिप्त रहने वाले ट्रैक्टर, डंपर, एक्सकेवेटर (पोकलेन) और अन्य भारी वाहनों में जीपीएस (GPS) सिस्टम लगाने की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है।

खान और परिवहन विभाग का दावा: 31 जुलाई तक लग जाएंगे सभी वाहनों में GPS

खान विभाग ने अदालत के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि चंबल क्षेत्र से सटे धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, बूंदी और कोटा जिलों में सभी माइनिंग और परिवहन वाहनों में जीपीएस लगाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। इस पूरी प्रक्रिया को 31 जुलाई 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरा कर लिया जाएगा।

वहीं, परिवहन विभाग ने कोर्ट को अवगत कराया कि वर्तमान में धौलपुर जिले में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सभी पंजीकृत खनन वाहनों में जीपीएस अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कोई भी वाहन स्वामी इन नियमों और निर्देशों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो परिवहन विभाग द्वारा उस वाहन को तुरंत जब्त करने की कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

TAGGED:AI Surveillance MiningDholpur NewsForest Department RajasthanGPS Vehicle TrackingIllegal Mining RajasthanJustice Vikram NathMining Mafia ActionNational Chambal SanctuarySupreme Court IndiaWildlife Protection Act
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