जयपुर/दिल्ली: राजस्थान के बहुचर्चित 900 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। एसीबी की टीम ने घोटाले के कथित मास्टरमाइंड और पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी के करीबी संजय बड़ाया को रविवार देर रात दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में ले लिया है। बड़ाया थाईलैंड में एक शादी समारोह में शामिल होकर भारत लौटा था, जहां पहले से मुस्तैद टीम ने उसे धर दबोचा।
लुक आउट नोटिस और नाटकीय गिरफ्तारी
संजय बड़ाया की गिरफ्तारी के लिए एसओजी (SOG) ने पहले ही लुक आउट नोटिस जारी करवाया था। वह पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी से ठीक दो दिन पहले विदेश भागने में सफल रहा था। रविवार रात करीब 2 बजे जैसे ही वह दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा, इमीग्रेशन विभाग की सूचना पर डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में एसीबी की टीम ने उसे हिरासत में ले लिया। टीम अब उसे लेकर जयपुर आ रही है, जहां उससे घोटाले की परतों को लेकर पूछताछ की जाएगी।
कौन है संजय बड़ाया?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, संजय बड़ाया इस पूरे घोटाले का मुख्य बिचौलिया और मास्टरमाइंड है।
- तेजी से बढ़ा रसूख: साल 2022 तक एक इंश्योरेंस कंपनी में महज 7 लाख रुपये सालाना के पैकेज पर काम करने वाला बड़ाया, जेजेएम घोटाले के दौरान देखते ही देखते करोड़पति बन गया।
- कथित भूमिका: आरोप है कि वह पूर्व मंत्री महेश जोशी और रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल के बेहद करीब था। वह ट्रांसफर-पोस्टिंग, टेंडरों में गड़बड़ी और घूस की रकम (बंदी) एकत्र करने का मुख्य काम देखता था।
- अवैध कब्जे का आरोप: ईडी की जांच में सामने आया कि उसने अपनी पत्नी नैना बड़ाया के साथ मिलकर ‘मैसर्स चमत्कारेश्वर बिल्डर्स एंड डेवलपर’ नाम की कंपनी बनाई और फर्जी दस्तावेजों के जरिए जेडीए की कीमती जमीनों पर कब्जे के प्रयास भी किए।
पूर्व मंत्री महेश जोशी की आज कोर्ट में पेशी
उधर, 7 मई को गिरफ्तार हुए पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी की 4 दिन की रिमांड अवधि आज (सोमवार) समाप्त हो रही है। एसीबी उन्हें आज कोर्ट में पेश करेगी।
- पूछताछ में खुलासा: रिमांड के दौरान जोशी से करीब 24 घंटे पूछताछ की गई। सूत्रों के अनुसार, जोशी ने घूस के आरोपों से इनकार किया है और सारा ठीकरा अधिकारियों पर फोड़ते हुए कहा कि उन्होंने केवल वही फाइलें एप्रूव कीं जो नीचे से उनके पास आई थीं।
- सजा का प्रावधान: यदि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोष सिद्ध होता है, तो जोशी और सुबोध अग्रवाल सहित अन्य आरोपियों को 10 साल तक की जेल हो सकती है।
बड़े अधिकारियों पर भी शिकंजा
इस मामले में तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल पहले ही 9 अप्रैल को गिरफ्तार किए जा चुके हैं और फिलहाल जेल में हैं। संजय बड़ाया की गिरफ्तारी के बाद अब कई अन्य रसूखदार लोगों और जलदाय विभाग के अधिकारियों के नाम सामने आने की संभावना है। फिलहाल इस मामले में 3 आरोपी अभी भी फरार चल रहे हैं।
