पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार, 9 मई 2026 का दिन एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक भव्य समारोह में सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के तौर पर पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल आर. एन. रवि ने उन्हें शपथ दिलाई, लेकिन इस नई कैबिनेट में सबसे ज्यादा चर्चा राजस्थान मूल के अशोक कीर्तनिया की हो रही है। कीर्तनिया को सुवेंदु सरकार में महत्वपूर्ण ‘कैबिनेट मंत्री’ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जड़ें राजस्थान की मरुधरा से जुड़ी हैं और वे उन प्रवासी राजस्थानियों के परिवार से आते हैं जो दशकों पहले व्यापार के सिलसिले में बंगाल में बस गए थे। बंगाल की राजनीति में सक्रिय होने के बावजूद उनका अपने मूल प्रदेश राजस्थान से गहरा सांस्कृतिक लगाव आज भी कायम है।
अशोक कीर्तनिया की यह जीत और कैबिनेट में शामिल होना उनकी जमीनी पकड़ का प्रमाण है। उन्होंने बनगांव उत्तर (SC) सीट से 40,670 वोटों के भारी अंतर से लगातार दूसरी बार जीत हासिल की है। मतुआ समुदाय के बीच उनकी जबरदस्त पैठ ने उन्हें बंगाल के प्रभावशाली दलित नेताओं की कतार में खड़ा कर दिया है। 52 वर्षीय कीर्तनिया एक सफल व्यवसायी होने के साथ-साथ कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। उल्लेखनीय है कि इस बार की चुनावी रणनीति में राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले 9 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया था, जिनमें से अशोक कीर्तनिया के अलावा विजय ओझा, भरत कुमार झंवर, अजय कुमार पोद्दार और राजेश कुमार ने भी शानदार जीत दर्ज की है। इन परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रवासी राजस्थानी समुदाय अब बंगाल की राजनीति में एक निर्णायक ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा रहा है।
