राजस्थान सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2025 को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही अनिश्चितता पर आज देश की सबसे बड़ी अदालत ने विराम लगा दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने आयु सीमा में छूट मांग रहे SI भर्ती-2021 के याचिकाकर्ताओं और उनके समान अन्य अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इन सभी को 3 और 5-6 अप्रैल को होने वाली परीक्षा में बैठने दिया जाए।
परीक्षा पर रोक नहीं, लेकिन ‘राहत’ का द्वार खुला
याचिकाकर्ता सूरजमल मीणा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीबी सुरेश और हरेन्द्र नील ने दलील दी थी कि हाईकोर्ट को 31 मार्च तक आयु सीमा पर फैसला देना था, लेकिन फैसला न आने से अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में है। उन्होंने परीक्षा को 4 सप्ताह टालने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया:
- परीक्षा यथावत: 5 और 6 अप्रैल को प्रस्तावित परीक्षा को स्थगित करने से कोर्ट ने इनकार कर दिया है।
- अस्थायी भागीदारी: जो अभ्यर्थी आयु सीमा के कारण बाहर थे, वे अब परीक्षा दे सकेंगे, लेकिन उनकी भागीदारी पूर्णतः अस्थायी (Provisional) होगी।
- सील बंद रिजल्ट: इन उम्मीदवारों का परीक्षा परिणाम तब तक घोषित नहीं होगा जब तक कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती; उनका रिजल्ट सीलबंद लिफाफे में रखा जाएगा।
सरकार की दलील: “अव्यवस्था फैलेगी”
राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने परीक्षा टालने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि हजारों अभ्यर्थी अपनी तैयारियां पूरी कर चुके हैं और राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर पूरी व्यवस्था कर ली है। आखिरी समय में परीक्षा रद्द करना जनहित में नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की इस दलील को मानते हुए परीक्षा की तारीखों में बदलाव नहीं किया।
विवाद की जड़: SI भर्ती 2021 बनाम 2025
यह पूरा मामला कानूनी पेचीदगियों में उलझा हुआ है:
- अगस्त 2025: हाईकोर्ट की एकलपीठ ने पेपरलीक के चलते 2021 की भर्ती रद्द की और अभ्यर्थियों को अगली भर्ती में आयु छूट की सिफारिश की।
- सितंबर 2025: खंडपीठ ने इस फैसले पर स्टे लगा दिया, जिससे आयु सीमा में छूट का मामला अटक गया।
- जनवरी 2026: हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई पूरी कर ली, लेकिन 2.5 महीने बाद भी फैसला नहीं सुनाया गया।
अभ्यर्थियों के लिए अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को उन सभी उम्मीदवारों के लिए व्यवस्था करनी होगी जिन्होंने आयु सीमा में छूट के लिए आवेदन किया था या जो इस श्रेणी में आते हैं। हालांकि, उनका भविष्य हाईकोर्ट के आने वाले उस फैसले पर टिका होगा जो पिछले ढाई महीने से ‘सुरक्षित’ रखा गया है।
