Saturday, March 21, 2026
राजधानीरसायन मुक्त खेती की ओर बढ़ता राजस्थान: भजनलाल सरकार ने तैयार किए 2000 क्लस्टर, किसानों को मिल रही ₹4000 की प्रोत्साहन राशि

रसायन मुक्त खेती की ओर बढ़ता राजस्थान: भजनलाल सरकार ने तैयार किए 2000 क्लस्टर, किसानों को मिल रही ₹4000 की प्रोत्साहन राशि

जयपुर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार किसानों के आर्थिक सशक्तीकरण और मिट्टी के स्वास्थ्य को बचाने के लिए ‘प्राकृतिक खेती’ (Natural Farming) को एक जन-आंदोलन का रूप दे रही है। प्रदेश के 2 लाख 50 हजार किसानों को इस मिशन से जोड़कर टिकाऊ कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे खेती की लागत कम हो और किसानों की आय में वृद्धि हो सके।


प्राकृतिक खेती मिशन: बजट 2025-26 की कार्ययोजना

राज्य सरकार ने इस वर्ष के बजट में प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार किया है:

  • किसानों का लक्ष्य: कुल 2.50 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य।
  • फंडिंग मॉडल: राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 2.25 लाख किसानों को केंद्र (60%) और राज्य (40%) के सहयोग से लाभ मिल रहा है।
  • विशेष पहल: अतिरिक्त 25 हजार किसानों को राज्य सरकार शत-प्रतिशत स्वयं के खर्च पर वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।

क्लस्टर आधारित एप्रोच और प्रशिक्षण

खेती को संगठित रूप देने के लिए राज्य के सभी जिलों में 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 2,000 क्लस्टर बनाए गए हैं।

  • क्लस्टर संरचना: प्रत्येक क्लस्टर में 50 हेक्टेयर क्षेत्र और लगभग 125 किसान शामिल हैं।
  • तकनीकी मार्गदर्शन: प्रत्येक क्लस्टर में किसानों के सहयोग के लिए कृषि सखी/सीआरपी की नियुक्ति की गई है, जिन्हें कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा प्रशिक्षित किया गया है।
  • मास्टर ट्रेनर्स: उदयपुर स्थित प्राकृतिक खेती केंद्र द्वारा वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

बायो इनपुट संसाधन केंद्र और प्रोत्साहन राशि

किसानों को प्राकृतिक उर्वरकों के लिए बाजार पर निर्भर न रहना पड़े, इसके लिए सरकार स्थानीय स्तर पर संसाधन विकसित कर रही है:

  1. डीबीटी के माध्यम से सहायता: चयनित किसानों को ऑन-फार्म इनपुट उत्पादन (जैसे जीवामृत, बीजामृत) की बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रति एकड़ 4,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक खातों में दी जा रही है।
  2. बायो इनपुट केंद्र: अब तक 180 बायो इनपुट संसाधन केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। प्रत्येक केंद्र की स्थापना के लिए 1 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि स्थानीय स्तर पर ही प्राकृतिक खाद और कीटनाशक तैयार हो सकें।

सतत भविष्य की ओर बढ़ते कदम

राज्य सरकार की इस पहल से न केवल किसानों की लागत कम होगी, बल्कि उपभोक्ताओं को रसायन मुक्त शुद्ध उत्पाद मिलेंगे। स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में राजस्थान अब देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होने की राह पर है।

“हमारा लक्ष्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और प्रदेश की धरती को रसायनों के जहर से मुक्त करना है। प्राकृतिक खेती भविष्य की कृषि का आधार है।” — मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

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