जयपुर। राजधानी के प्रतिष्ठित नीरजा मोदी स्कूल में 8 वर्षीय मासूम छात्रा अमायरा की मौत का मामला अब एक गंभीर प्रशासनिक और कानूनी विवाद का रूप ले चुका है। The Public Hub द्वारा पूर्व में किए गए “एक्सक्लूसिव खुलासे” और अब The Public Hub की निरंतर पड़ताल ने राजस्थान सरकार और शिक्षा विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या रसूखदार संस्थानों के लिए नियम और मासूमों की जान की कोई कीमत नहीं है?
The Public Hub की रिपोर्ट ने उजागर की सच्चाई
The Public Hub की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि 1 नवंबर 2025 को हुई अमायरा की मौत के बाद स्कूल प्रबंधन ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की। रिपोर्ट के अनुसार, घटना के तुरंत बाद सबूत मिटाने के उद्देश्य से खून से सनी सीढ़ियों को धो दिया गया। The Public Hub शिक्षा विभाग से यह सवाल पूछता है कि इतने गंभीर अपराध और सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने के बाद भी महज एक ‘खेद’ (Sorry) जताने पर स्कूल की मान्यता कैसे बहाल कर दी गई?
बिना राज्य मान्यता के अवैध संचालन: विभाग की चुप्पी पर सवाल
The Public Hub के फॉलो-अप में यह बड़ा मुद्दा उठा है कि नीरजा मोदी स्कूल के पास कक्षा 9 से 12 तक के संचालन के लिए राजस्थान शिक्षा विभाग की अनिवार्य मान्यता (Recognition) ही नहीं है। यह ‘राजस्थान गैर-सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम 1989’ और विभागीय आदेश 19823 का सीधा उल्लंघन है। The Public Hub सरकार से पूछता है कि बिना NOC और बिना मान्यता के सालों से ये कक्षाएं किसके संरक्षण में चल रही हैं?
प्रशासन और सरकार से सीधे सवाल: मिरर फाउंडेशन द्वारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लिखे पत्र और The Public Hub की रिपोर्ट ने सिस्टम की ‘मनमानी’ को उजागर कर दिया है। The Public Hub निम्नलिखित प्रश्न उठाता है:
- जब CBSE ने स्वीकार किया कि एंटी-बुलिंग और सुरक्षा दिशा-निर्देश केवल कागजों पर थे, तो राज्य सरकार ने कठोर कानूनी कार्रवाई के बजाय मौन क्यों साधा?
- नियम 8-ख के तहत, सुरक्षा मानकों की विफलता पर स्कूल की मान्यता तुरंत रद्द क्यों नहीं की गई?
- क्या रसूखदार स्कूल प्रबंधन कानून से ऊपर है?
अब समय आ गया है कि शिक्षा विभाग और राज्य सरकार The Public Hub द्वारा उठाए गए इन गंभीर सवालों का जवाब दे और अमायरा के परिवार को न्याय दिलाए।
