जयपुर। राजस्थान में बेरोजगारी के आंकड़ों ने एक बार फिर प्रदेश की चिंता बढ़ा दी है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत निदेशालय रोजगार (Directorate of Employment) द्वारा दी गई जानकारी ने जिला रोजगार कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 22 लाख 21 हजार 317 अभ्यर्थी नौकरी की तलाश में पंजीकृत हैं, लेकिन पिछले 5 वर्षों में इन कार्यालयों के माध्यम से एक भी अभ्यर्थी को सरकारी क्षेत्र में नियुक्ति नहीं मिली है।
जिलों का हाल: जयपुर में सबसे ज्यादा ‘बेरोजगार’ RTI कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, 14 जनवरी 2026 तक की स्थिति बताती है कि प्रदेश के युवा रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं:
- कुल पंजीकृत: 22,21,317 (पुरुष: 13.08 लाख, महिला: 9.12 लाख)
- सर्वाधिक बेरोजगारी वाले जिले: राजधानी जयपुर 2.51 लाख युवाओं के साथ पहले पायदान पर है। इसके बाद अलवर (1.53 लाख), नागौर (1.34 लाख), झुंझुनूं (1.22 लाख) और जोधपुर (86,320) का नंबर आता है।
- न्यूनतम पंजीकरण: जैसलमेर (12,031) और प्रतापगढ़ (14,047) में सबसे कम युवा पंजीकृत हैं।
प्राइवेट सेक्टर में भी ‘सूखा’ रोजगार कार्यालयों का उद्देश्य युवाओं को निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों में प्लेसमेंट दिलाना होता है, लेकिन पिछले 5 सालों में सरकारी क्षेत्र में प्लेसमेंट का आंकड़ा ‘शून्य’ रहा। निजी क्षेत्र (Private Sector) के हालात भी बेहद खराब हैं:
- 2021: 86 प्लेसमेंट
- 2023: मात्र 03 प्लेसमेंट
- 2025: केवल 71 प्लेसमेंट
जातिगत आधार पर OBC वर्ग सबसे आगे श्रेणीवार आंकड़ों (Category-wise data) के विश्लेषण से पता चलता है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थी सबसे बड़ी संख्या में नौकरी की तलाश में हैं। इसके बाद सामान्य (General), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का स्थान आता है।
नाम के रह गए रोजगार कार्यालय? विशेषज्ञों और आरटीआई आवेदक का मानना है कि पिछले दो दशकों में निजी क्षेत्र में भारी निवेश के बावजूद निदेशालय द्वारा प्रदान की जाने वाली नौकरियां नगण्य हैं। हालांकि, विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि वे ‘रोजगार संदेश’ और रोजगार मेलों के माध्यम से युवाओं को जानकारी उपलब्ध कराते हैं, लेकिन 22 लाख युवाओं की फौज के सामने ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
