अजमेर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के गलियारों में महिला सुरक्षा और कार्यस्थल पर सम्मान को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आयोग में तैनात एक वरिष्ठ महिला अधिकारी ने 11 पुरुष कर्मचारियों के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना और भद्दे कमेंट्स करने की लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता ने इन हरकतों को अपनी ‘इज्जत पर हमला’ करार दिया है।
18 साल की बेदाग सर्विस में पहली बार प्रताड़ना: पीड़ित महिला अधिकारी ने आयोग के अध्यक्ष यूआर साहू को भेजे पत्र में अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे पिछले 18 वर्षों से सेवा में हैं, लेकिन उन्हें कभी ऐसी मानसिक पीड़ा का सामना नहीं करना पड़ा। शिकायत के अनुसार, आरोपी कर्मचारी पिछले तीन महीनों से लगातार उन पर भद्दी टिप्पणियां कर रहे हैं। ये कमेंट्स ऑफिस आते-जाते समय उनके सामने और पीठ पीछे किए जा रहे हैं, जो इतने बेहूदा हैं कि उन्हें पत्र में लिखा भी नहीं जा सकता।
धमकी और सोशल मीडिया का दुरुपयोग: शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि एक अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर कार्यरत कर्मचारी के जरिए अधिकारी को धमकी भी दी गई। उस कर्मचारी ने कथित तौर पर कहा कि “अपनी अफसर से कह देना कि उसकी नौकरी गलत तरीके से लगी है, उसे हटवा देंगे”। इतना ही नहीं, पीड़ित ने सबूत के तौर पर सोशल मीडिया पर शेयर किए गए ‘डबल मीनिंग’ चैट और स्टेटस के प्रिंटआउट भी आयोग को सौंपे हैं।
पदोन्नति (DPC) में देरी बनी कारण! महिला अधिकारी का मानना है कि इस उत्पीड़न के पीछे विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) में हो रही देरी एक मुख्य कारण है। आयोग में नए पदों के सृजन और पदोन्नति अनुपात में हुए बदलाव की वजह से डीपीसी प्रक्रिया धीमी हुई है, जिससे नाराज कुछ कर्मचारी उन्हें निशाना बना रहे हैं।
कमेटी का पुनर्गठन और जांच शुरू: मामले की गंभीरता को देखते हुए आरपीएससी ने महिला उत्पीड़न निवारण समिति का पुनर्गठन किया है। उपसचिव चित्रा जैनानी को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। जैनानी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 13 मार्च को सभी 11 नामजद कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है और उन्हें 25 मार्च 2026 तक अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
