Saturday, March 21, 2026
राजस्थानराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रचा इतिहास: स्वदेशी हेलिकॉप्टर 'प्रचंड' में भरी उड़ान, जैसलमेर के आसमान से देश को दिया 'जय हिंद' का संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रचा इतिहास: स्वदेशी हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ में भरी उड़ान, जैसलमेर के आसमान से देश को दिया ‘जय हिंद’ का संदेश

जैसलमेर। भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को एक नया इतिहास रच दिया है। जैसलमेर एयरफोर्स स्टेशन से स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (LCH) ‘प्रचंड’ में उड़ान भरकर वे इस लड़ाकू हेलिकॉप्टर में बतौर को-पायलट बैठने वाली देश की पहली राष्ट्रपति बन गई हैं। इससे पहले वे सुखोई और राफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों में भी उड़ान भर चुकी हैं।

कॉकपिट से देश के नाम संदेश

सुबह करीब 10:15 बजे ग्रुप कैप्टन एन.एस. बहुआ के साथ उड़ान भरने के बाद राष्ट्रपति ने जैसलमेर के ऐतिहासिक सोनार दुर्ग के ऊपर से रेडियो के माध्यम से देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा:

“प्रचंड हेलिकॉप्टर आत्मनिर्भरता का प्रबल प्रतीक है। मैं इस समय जैसलमेर के प्रसिद्ध किले के ऊपर से उड़ान भर रही हूं। मैं देश के वीर सैनिकों को गर्व के साथ धन्यवाद देती हूं। जय हिंद, जय भारत।”

25 मिनट का हवाई जायजा

राष्ट्रपति ने ‘प्रचंड’ में लगभग 25 मिनट तक उड़ान भरी। इस दौरान उन्होंने भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित सीमावर्ती क्षेत्रों और पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज का हवाई निरीक्षण किया। उड़ान से पहले वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें स्वदेशी तकनीक से निर्मित इस हेलिकॉप्टर की मारक क्षमता और विशेषताओं के बारे में विस्तार से ब्रीफिंग दी।

शाम को ‘वायु शक्ति-2026’ का प्रदर्शन

हवाई उड़ान के बाद राष्ट्रपति मुर्मू शाम करीब 5 बजे पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज पहुंचेंगी। यहाँ वे भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े युद्धाभ्यास ‘वायु शक्ति-2026’ की साक्षी बनेंगी। इस कार्यक्रम में:

  • वायुसेना के लड़ाकू विमान अपनी सटीक मारक क्षमता का प्रदर्शन करेंगे।
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहेंगे।
  • स्वदेशी हथियारों और विमानों के पराक्रम का प्रदर्शन किया जाएगा।

वायुसेना प्रमुख ने भेंट की खास तस्वीर

इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने के लिए एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने राष्ट्रपति को एक मोमेंटो भेंट किया। साथ ही, उन्हें ‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टर के साथ ली गई उनकी पहली तस्वीर भी उपहार स्वरूप दी गई।

यह उड़ान न केवल भारतीय वायुसेना के मनोबल को बढ़ाने वाली है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ की बढ़ती ताकत को भी वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करती है।

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