जयपुर: देश के कई राज्य जहां अभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नाम पर केवल चैटबॉट तक सीमित हैं, वहीं राजस्थान ने इस क्षेत्र में एक लंबी छलांग लगाई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी और संचार (IT&C) विभाग ने एक एडवांस्ड ‘कंप्यूटर विजन-आधारित एआई एप्लिकेशन’ (Face Similarity Search System) तैयार किया है।
इस तकनीक ने शासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का काम बेहद आसान कर दिया है। अब सिर्फ एक चेहरे की स्कैनिंग से प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले डमी कैंडिडेट्स, आदतन अपराधियों और लावारिस शवों की पहचान सटीकता से की जा रही है।
इन 3 प्रमुख क्षेत्रों में AI कर रहा है ‘कमाल’
सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के आयुक्त हिमांशु गुप्ता के अनुसार, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेंटर द्वारा विकसित यह AI प्रणाली इन महत्वपूर्ण कार्यों में मील का पत्थर साबित हो रही है:
1. डमी अभ्यर्थियों पर नकेल (50 लाख का डेटाबेस): प्रतियोगी परीक्षाओं में सबसे बड़ी चुनौती ‘डमी कैंडिडेट’ (दूसरे की जगह परीक्षा देने वाले) होते हैं।
- विभाग के AI सिस्टम में 50 लाख पंजीकृत अभ्यर्थियों का डेटाबेस मौजूद है।
- जब किसी संदिग्ध अभ्यर्थी का फोटो सिस्टम में डाला जाता है, तो यह ‘हाई-एक्यूरेसी फेस सिमिलैरिटी मैचिंग’ के जरिए तुरंत असली और डमी कैंडिडेट का फर्क बता देता है।
- इससे भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता आ रही है और मेधावी छात्रों के अधिकारों की रक्षा हो रही है।
2. आदतन अपराधियों की तुरंत पहचान (10 लाख का रिकॉर्ड): पुलिस और जांच एजेंसियों की सहायता के लिए एक विशेष आपराधिक डेटाबेस तैयार किया गया है।
- इस सिस्टम में 10 लाख अपराधियों के फोटो दर्ज हैं।
- अपराध स्थल या सीसीटीवी से मिली किसी भी संदिग्ध तस्वीर का मिलान इस डेटाबेस से पलक झपकते ही हो जाता है।
- इससे आदतन अपराधियों की निगरानी और गिरफ्तारी में तेजी आई है।
3. लावारिस शवों की मानवीय पहचान: जनसेवा की दिशा में भी यह तकनीक एक संवेदनशील कदम है।
- इस एप्लिकेशन के जरिए अज्ञात या लावारिस शवों के फोटोग्राफ का मिलान ‘गुमशुदा व्यक्तियों’ के डेटाबेस से किया जा रहा है।
- इससे परिजनों को अपनों की जानकारी देने और कानूनी प्रक्रिया को पूरी करने में बड़ी मदद मिल रही है।
डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा का रखा गया पूरा ध्यान
इतने बड़े स्तर पर डेटा के उपयोग को लेकर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। IT विभाग ने इन सभी AI एप्लिकेशंस को राजस्थान स्टेट डेटा सेंटर के ‘एयर-गैप्ड वातावरण’ (Air-Gapped Environment) में डिप्लॉय किया है, जिसे हैक करना लगभग असंभव है। इसके साथ ही, ऑडिट लॉगिंग, डेटा संरक्षण और प्राइवेसी के मानकों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है, ताकि तकनीक का केवल नैतिक (Ethical) उपयोग हो सक
