राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों (Rajasthan Panchayat-Nikay Chunav 2026) पर छाया संकट अब टल गया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पंचायतों के परिसीमन (Delimitation) और मुख्यालय बदलने के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है। इस फैसले के साथ ही प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरी करने का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार की दलील: 15 अप्रैल तक चुनाव कराना जरूरी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) के.एम. नटराज और महाधिवक्ता (AG) शिवमंगल शर्मा ने जोरदार पैरवी की।
- सरकार ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
- 25 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) का प्रकाशन होना है।
- संवैधानिक बाध्यता के तहत 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करानी आवश्यक है। इसलिए परिसीमन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की जानी चाहिए।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘लोकतांत्रिक व्यवस्था में दखल नहीं’ मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जॉयमाल्य बागची और न्यायाधीश विपुल एम. पंचोली की पीठ ने जयसिंह द्वारा दायर एसएलपी पर सुनवाई की।
- कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अदालत की ओर से इसमें हस्तक्षेप करने से परहेज करना चाहिए।
- इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के 21 जनवरी 2026 के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें हाईकोर्ट ने परिसीमन और मुख्यालय बदलाव को सही ठहराया था।
क्या था मामला? याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायतों के मुख्यालय बदलना और परिसीमन करना मनमाना है और इसमें गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया। उन्होंने 2025 की संशोधित अधिसूचनाओं को चुनौती दी थी, जिसे पहले हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत नियमों के अनुसार की गई है।
